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धरसीवां में शासकीय प्राथमिक शाला की जमीन पर निजी स्कूल का निर्माण: कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के दिए आदेश

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धरसीवां में शासकीय प्राथमिक शाला की जमीन पर निजी स्कूल का निर्माण: कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए

धरसीवां (सत्यानंद सोई)।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के समीप स्थित धरसीवां विकास खंड के सिलतरा में एक विवादित मामले ने सुर्खियां बटोर ली हैं। यहां शासकीय प्राथमिक शाला की जमीन पर एक निजी स्कूल की बहुमंजिला इमारत का निर्माण हो गया है। आश्चर्यजनक रूप से, इस निजी प्राथमिक शाला को जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा 2019 में मान्यता भी प्रदान की गई थी। इस मामले ने शिक्षा और प्रशासनिक क्षेत्र में हलचल मचा दी है, और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।

सत्यता की जांच पर कलेक्टर की नजर

शनिवार, 10 अगस्त को कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर तहसीलदार जयेंद्र सिंह और सिलतरा के पटवारी ने शासकीय प्राथमिक शाला के परिसर का दौरा किया। जांच के दौरान, उन्होंने निजी स्कूल के निर्माण को देखा और शासकीय स्कूल के प्रधान पाठक, शिक्षकों, और निजी स्कूल के प्राचार्य केआर साहू से बातचीत की।

पटवारी पंचराम गायकवाड़ ने बताया कि पहले शासकीय प्राथमिक शाला की ओर से सीमांकन की मांग की गई थी, जिसमें स्पष्ट रूप से यह जमीन शासकीय स्कूल की थी। उनके अनुसार, निजी स्कूल का निर्माण पूरी तरह से शासकीय स्कूल की जमीन पर किया गया है।

निजी स्कूल का प्राचार्य स्वीकारते हैं कि जमीन शासकीय है

निजी स्कूल के प्राचार्य केआर साहू ने इस बात की पुष्टि की कि उनका स्कूल शासकीय प्राथमिक शाला की जमीन पर बना हुआ है। उन्होंने 1995 में हाई स्कूल की शुरुआत की और इसके बाद हायर सेकेंड्री स्कूल शुरू किया। 2019 में, उन्होंने जिला शिक्षा कार्यालय से प्राथमिक शाला की मान्यता प्राप्त की और नर्सरी से कक्षाएं शुरू कीं।


 

धरसीवां में शासकीय प्राथमिक शाला की जमीन पर निजी स्कूल का निर्माण: कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए

 

शासकीय प्राथमिक शाला को होने वाली समस्याएं

शासकीय प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक और शिक्षकों ने बताया कि निजी स्कूल के निर्माण से शासकीय स्कूल को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य द्वार बंद नहीं हो पाने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। विद्यालय के सामने स्थित तालाब की वजह से बच्चों की सुरक्षा और भी गंभीर मुद्दा बन गया है।

शिक्षकों ने यह भी बताया कि निजी स्कूल की उपस्थिति के कारण शासकीय स्कूल की खेल सुविधाएं और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इससे पहले शासकीय स्कूल की जमीन पर निजी स्कूल का निर्माण न होने की स्थिति में मुख्य द्वार बंद रखा जा सकता था और खेल मैदान का उपयोग बेहतर तरीके से किया जा सकता था।

पारंपरिक दान और इसके विपरीत परिणाम

मामले की जड़ में एक पुराना दान भी है। दानदाता जगमोहन लाल जी ने शासकीय प्राथमिक शाला के लिए अपने निजी जमीन पर भवन निर्माण का प्रस्ताव दिया था। इस भवन का निर्माण शासकीय स्कूल के सामने किया गया था। हालांकि, उस समय शासकीय माध्यमिक शाला की मंजूरी प्राप्त हो चुकी थी, और दानदाता द्वारा निर्मित भवन का उपयोग हाई स्कूल के लिए नहीं किया गया। इसके बजाय, दानदाता द्वारा निर्मित भवन में निजी स्कूल शुरू हो गया।

धीरे-धीरे, इस निजी स्कूल ने अपने दायरे को बढ़ाया और चार कमरों से एक बहुमंजिला इमारत तक पहुंच गया। अब यह स्कूल शासकीय प्राथमिक शाला की जमीन पर पूरी तरह से कब्जा कर चुका है, जो कि शिक्षा के क्षेत्र में एक गंभीर मुद्दा बन गया है।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

जांच अधिकारी तहसीलदार जयेंद्र सिंह ने पुष्टि की है कि निजी स्कूल का निर्माण शासकीय स्कूल की जमीन पर हुआ है और उन्होंने इस मामले की जांच रिपोर्ट कलेक्टर को भेजने की बात कही है।

इस मामले की जांच और त्वरित कार्रवाई के लिए प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से ध्यान दिया जा रहा है। अब यह देखना होगा कि कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर इस विवाद का समाधान कैसे किया जाता है और क्या शासकीय प्राथमिक शाला की जमीन पर कब्जा किए गए निजी स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है।

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