सूरजपुर मां-बेटी हत्याकांड में आया बड़ा फैसला वैज्ञानिक साक्ष्यों ने दिलाई दरिंदों को फांसी की सजा
OM Darpan
सूरजपुर। शहर को झकझोर कर रख देने वाले बहुचर्चित मां-बेटी दुष्कर्म और हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देते वक्त दरिंदों ने कोई चश्मदीद गवाह नहीं छोड़ा था, लेकिन फॉरेंसिक और डिजिटल सबूतों ने उन्हें सलाखों के पीछे से सीधा फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया है। अदालत ने पुलिस की चार्जशीट और डीएनए रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए दोषियों को सजा-ए-मौत सुनाई है। फांसी की सजा की कानूनी पुष्टि के लिए अब मामले से जुड़े सभी दस्तावेज बिलासपुर हाईकोर्ट भेज दिए गए हैं।
जिलाबदर होने के बावजूद दिया वारदात को अंजाम
अदालत में पेश चार्जशीट के मुताबिक, मुख्य साजिशकर्ता कुलदीप साहू आपराधिक प्रवृत्तियों के चलते जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर जिलाबदर था। इसके बावजूद वह बेखौफ होकर शहर में घूम रहा था। वारदात वाली रात जब पुलिस टीम चेकिंग कर रही थी, तब कुलदीप ने उन पर खौलता हुआ तेल फेंक दिया और वहां से फायरिंग करते हुए फरार हो गया। बताया गया कि एक पुलिसकर्मी से उसकी पुरानी रंजिश थी। इसी का बदला लेने के लिए वह अपने साथियों के साथ पुलिसकर्मी के घर में घुसा और इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया।
सीढ़ियों के फिंगरप्रिंट और डीएनए से खुली पोल
इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने में पुलिस के लिए वैज्ञानिक जांच सबसे बड़ा हथियार बनी। जांच टीम को पुलिसकर्मी के घर की रसोई से कुछ इंसानी बाल मिले थे। इसके अलावा मृतका के कपड़ों पर मिले खून के धब्बे और सीढ़ियों की रेलिंग पर मिले फिंगरप्रिंट अहम सुराग साबित हुए। जब फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों ने जांच की, तो वे निशान मुख्य आरोपी कुलदीप साहू से हूबहू मैच कर गए। वहीं, डीएनए प्रोफाइलिंग में घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों का आरोपियों से सीधा मिलान हो गया, जिसने अदालत में अभियोजन पक्ष का दावा बेहद मजबूत कर दिया।
आरोपियों की हर मनगढ़ंत कहानी कोर्ट में हुई फेल
सजा से बचने के लिए आरोपियों ने अदालत में कई कहानियां गढ़ीं। मुख्य आरोपी कुलदीप ने दलील दी कि घटना के दिन पुलिस ने उसे अवैध हिरासत में रखा था। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने जबरन उसके खून, स्पर्म, बालों और उंगलियों-हथेली के निशान ले लिए ताकि उसे झूठे केस में फंसाया जा सके। वहीं दूसरे आरोपी फूल सिंह उर्फ रिंकू ने दुर्गा विसर्जन में शामिल होने के फोटो-वीडियो का हवाला देकर खुद को बेकसूर बताया, जबकि चंद्रकांत ने दावा किया कि उसे फंसाने के लिए कपड़े प्लांट किए गए हैं। लेकिन जज ने इन सभी बचाव तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया।
51 गवाह और पुख्ता सबूत बने मौत की सजा का आधार
इस सनसनीखेज वारदात में कुल छह आरोपी बनाए गए थे। पुलिस ने अदालत में 51 गवाहों के बयान दर्ज कराए और चार आरोपियों के खिलाफ पुख्ता डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट पेश की। इनमें आरोपियों की कॉल डिटेल्स को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया। सबूतों की इन्हीं कड़ियों को जोड़ते हुए अदालत ने फैसला सुनाया। हालांकि, सूरज साहू नाम के आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिल सके, जिसके चलते अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया है।
रायपुर सेंट्रल जेल की अलग-अलग बैरकों में कैद हैं दोषी
अदालत से मौत की सजा मुकर्रर होने के बाद इस वारदात के तीनों मुख्य आरोपी फिलहाल रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद हैं। सुरक्षा कारणों और जेल नियमों के तहत तीनों को अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। चश्मदीद गवाह के अभाव में केवल वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया यह फैसला नजीर बन गया है। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस कड़े फैसले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अंतिम मुहर लगने का इंतजार है, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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