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फैसला अटल: विरोध के बावजूद वहीं बनेगा बायोगैस प्लांट, मुख्यमंत्री ने विधानसभा में किया बड़ा ऐलान!

भिलाई बायोगैस प्लांट

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छत्तीसगढ़ विधानसभा: मुख्यमंत्री ने खारिज की बायोगैस प्लांट के स्थल परिवर्तन की मांग, जामुल-कुरूद में प्रक्रिया पूरी

रायपुर/भिलाई (रोहितास सिंह भुवाल)।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान वैशाली नगर विधायक श्री रिकेश सेन द्वारा भिलाई के कुरूद-जामुल क्षेत्र में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा गया। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सदन में स्पष्ट कर दिया है कि नगर निगम भिलाई द्वारा जामुल (कुरूद) के समीप प्रस्तावित बायोगैस/बायोफ्यूल प्लांट के स्थल परिवर्तन का वर्तमान में कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि यह प्लांट पूर्व निर्धारित स्थल पर ही स्थापित किया जाएगा।

60 करोड़ की लागत और 130 टन कचरे का होगा निस्तारण

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत 60 करोड़ रुपये है। यह प्लांट न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि प्रतिदिन 130 टन नगरीय ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण करने में भी सक्षम होगा।

लीज डीड और भूमि का विवरण

परियोजना के लिए ग्राम जामुल और ग्राम कुरूद में कुल 5.5 एकड़ भूमि का चयन किया गया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, इस भूमि का लीज डीड पंजीयन 11 दिसंबर 2025 को ही निष्पादित किया जा चुका है, जो इस प्रोजेक्ट की दिशा में एक बड़ी वैधानिक सफलता है।

जनसुनवाई और पारदर्शिता पर सरकार का पक्ष

प्लांट निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर हो रहे विरोध और विधायक श्री रिकेश सेन द्वारा जनसुनवाई की सहमति पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थल चयन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही है। उन्होंने बताया कि लीज डीड के पंजीयन से पूर्व, 14 नवंबर 2025 को कलेक्टर न्यायालय दुर्ग द्वारा शाम 5 बजे नियमानुसार जनसुनवाई आयोजित की गई थी, जिसमें स्थानीय निवासियों के पक्ष को सुना गया था।

निर्जन स्थान पर शिफ्ट करने की मांग खारिज

विधायक श्री रिकेश सेन ने सुझाव दिया था कि जनविरोध को देखते हुए प्लांट को किसी अन्य निर्जन स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। इस पर सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए बताया कि वर्तमान प्रस्तावित स्थल की उपयोगिता की पुष्टि कलेक्टर, जिला दुर्ग द्वारा 5 दिसंबर 2025 को जारी राजस्व आदेश के माध्यम से की जा चुकी है। अतः इसे किसी अन्य स्थान पर ले जाने का कोई प्रस्ताव फिलहाल शासन के पास विचाराधीन नहीं है।

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