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PWD उपअभियंता से डिजिटल ठगी: शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का झांसा देकर 9.75 लाख ठगे, फर्जी एडवाइजर बनकर किया खेल

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  • गोबरा-नवापारा थाने में केस दर्ज

  • सेबी से सत्यापन कराने पर खुला राज

  • पुलिस ने खंगाले बैंक खाते और ट्रांजेक्शन ट्रेल

रायपुर।

राजधानी में साइबर ठगों के हौसले बुलंद हैं। अब ठगों ने पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) में पदस्थ एक उपअभियंता को अपना शिकार बनाया है। एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र बताकर और शेयर बाजार में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर उपअभियंता से 9 लाख 75 हजार रुपये ठग लिए। पीड़ित की शिकायत पर गोबरा-नवापारा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

ऐसे जाल में फंसाया

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित उपअभियंता के पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया था। आरोपी ने खुद को शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड का विशेषज्ञ बताया। उसने दावा किया कि वह सेबी (SEBI) द्वारा प्रमाणित सलाहकार है। उपअभियंता को भरोसे में लेने के लिए ठग ने शुरुआत में छोटे निवेश पर तुरंत लाभ दिखाया। झांसे में आकर अधिकारी ने अलग-अलग बैंक खातों और यूपीआई आईडी के जरिए कुल 9.75 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

सेबी की साइट पर चेक किया तो उड़ गए होश

रुपये जमा करने के बाद जब ठग और पैसों की मांग करने लगा, तो उपअभियंता को संदेह हुआ। उन्होंने तत्काल सेबी (SEBI) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर कथित एडवाइजर के लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की जांच की। जांच में पता चला कि निवेश सलाहकार होने का दावा करने वाले व्यक्ति का सेबी से कोई वास्ता नहीं है। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

खातों की डिजिटल ट्रेल खंगाल रही पुलिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए गोबरा-नवापारा पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है। पुलिस उन बैंक खातों और यूपीआई आईडी की तकनीकी जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस को आशंका है कि यह किसी संगठित साइबर गिरोह का काम हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक और सर्विस प्रोवाइडर से ट्रांजेक्शन रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की जाएगी।

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