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अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के जरिए श्रमिकों के बच्चों को मिल रही है DPS और राजकुमार कॉलेज जैसे बड़े संस्थानों में मुफ्त शिक्षा
✍️ डिजिटल डेस्क
रायपुर | छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रमिक परिवारों के बच्चों की हौसला अफजाई की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर देना है। इस दौरान साय ने डीबीटी के माध्यम से 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों के बैंक खातों में 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि सीधे ट्रांसफर की।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना का दायरा पिछले साल के 100 बच्चों से बढ़ाकर अब 200 बच्चों तक कर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे अब राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। समारोह में राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले बीजापुर के छात्र अतीश ने आईएएस बनने का सपना साझा किया, वहीं रुंगटा पब्लिक स्कूल की छात्रा इशिका डाहरे ने अंग्रेजी संवाद के जरिए बढ़ते आत्मविश्वास की झलक पेश की।
*** ढाई साल में 774 करोड़ की मदद और नक्सल मुक्त विकास ***
श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने जानकारी दी कि पिछले ढाई वर्षों में श्रमिकों के खातों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद पर निर्णायक सफलता मिल रही है और ओरछा व जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी जैसी पहल की जा रही है। उन्होंने बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया और उनके सवालों के जवाब देकर अनुशासन और मेहनत की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, डॉ. रामप्रताप सिंह, सांसद लक्ष्मी वर्मा और विधायक पुरंदर मिश्रा ने भी शिरकत की। साथ ही छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष किशोर महानंद और श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित अन्य अधिकारी व अभिभावक मौजूद रहे। साय ने कहा कि प्रदेश में आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे संस्थान उपलब्ध हैं और श्रमिक बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए भी सहायता दी जा रही है।









