सड़क पर मौत का खेल खत्म! दुर्ग में गौवंश को रेडियम बेल्ट पहनाकर हादसों पर लगाम
OM Darpan
Aug 01, 2025 06:46 am
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01 Aug 2025
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छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन ने दुर्ग में सड़क पर घूमते मवेशियों को पहनाई रेडियम बेल्ट
सड़क पर बेजुबानों का खतरा
वर्तमान में सामने आ रही सड़क दुर्घटनाओं में मवेशियों की भूमिका अहम बताई जा रही है। ये बेजुबान जानवर अक्सर शहरों और गांवों की मुख्य सड़कों को अपना सुरक्षित ठिकाना मानकर वहां बैठ या खड़े रहते हैं। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि वाहनों की इनसे टक्कर होने पर गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें मवेशियों के साथ-साथ आम नागरिकों की जान को भी खतरा बना रहता है। यातायात विभाग समय-समय पर ऐसे अभियान चलाता रहा है, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।सरकारी प्रयास क्यों हुए नाकाम?
राज्य सरकारें हर वर्ष इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए 'रोका-छेका अभियान' चलाती रही हैं। मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए चारागाह और गौठान भी बनाए जाते रहे, लेकिन ये प्रयास अक्सर असफल साबित हुए। छत्तीसगढ़ की वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार ने तो अपने घोषणापत्र में बड़े बजट के साथ 'गौ अभ्यारण्य उद्यान' बनाने की दूरदर्शी सोच रखी है। हालांकि, यह योजना कब तक धरातल पर उतरेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में फौरी तौर पर दुर्घटनाओं को कुछ हद तक रोकने में रेडियम बेल्ट बांधना एक प्रभावी कदम दिख रहा है।रेडियम बेल्ट: तात्कालिक समाधान
रेडियम बेल्ट रात के समय गाड़ियों की रोशनी पड़ने पर दूर से चमकती है, जिससे वाहन चालक को सड़क पर मौजूद मवेशी आसानी से दिखाई दे जाते हैं। इससे चालक को समय रहते सतर्क होने और दुर्घटना से बचने का मौका मिल जाता है। यह उपाय उन मौतों को रोकने में मददगार साबित हो सकता है जो रात के अंधेरे में मवेशियों या सड़क पर बैठे नागरिकों की दुर्घटनाओं के कारण होती हैं।समस्या कहीं बड़ी है
दुर्ग जिला छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष अभिषेक साहू ने बताया कि एक न्यूज़ रिपोर्टर के तौर पर जब वे मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं या गौ सेवा करने वालों का कवरेज करने जाते थे, तो सड़कों पर बैठने वाले मवेशियों का सही आकलन नहीं कर पाए थे। लेकिन जब मीडिया साथी स्वयं शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, आवागमन मार्गों और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर रेडियम बेल्ट बांधने गए, तो उन्हें पता चला कि इनकी संख्या हजारों में है। साहू ने कहा कि यह संख्या इतनी बड़ी है कि पचास-सौ रेडियम बेल्ट से इसे पूरा नहीं किया जा सकता। उनका तात्पर्य है कि जब तक शासन-प्रशासन द्वारा इनकी स्थाई व्यवस्था नहीं हो पाती, तब तक इस समस्या के समाधान के लिए एक वृहद और व्यापक अभियान सभी के सहयोग से ही पूरा किया जा सकता है।
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