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मद्रास जर्नल सीरीज ने उत्कृष्ट प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों के लिए दिया सम्मान; 37 वर्षों का रहा है अनुभव
दुर्ग/रायपुर (रोहितास सिंह भुवाल)।
दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग के पूर्व अधिष्ठाता (डीन) डॉ. शैलेन्द्र कुमार तिवारी को प्रतिष्ठित “इन्सपायरिंग डीन अवार्ड 2025” से नवाजा गया है। मद्रास जर्नल सीरीज प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई द्वारा यह सम्मान उन्हें डीन पद पर रहते हुए किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए दिया गया है। शिक्षक दिवस-2025 के अवसर पर आयोजित एक ऑनलाइन समारोह में उन्हें सर्टिफिकेट और मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
डॉ. तिवारी पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा में पूर्व निदेशक शिक्षण और सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
37 वर्षों का शैक्षणिक और अनुसंधान अनुभव
डॉ. तिवारी का शैक्षणिक रिकॉर्ड शुरू से ही उत्कृष्ट रहा है। वे स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं। पीएचडी में उन्हें ‘जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। एक शिक्षक, अनुसंधानकर्ता और एक्सटेंशन वर्कर के रूप में उन्हें कुल 37 वर्षों का अनुभव है। इस लंबी अवधि में उन्होंने शिक्षण और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
290 शोधपत्र और 6 पुस्तकें प्रकाशित
अकादमिक क्षेत्र में डॉ. तिवारी की उपलब्धियां व्यापक हैं। उन्होंने अब तक 36 स्नातकोत्तर और 03 पीएचडी छात्रों को गाइड किया है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में उनके 290 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने 6 पुस्तकें भी लिखी हैं। विश्वविद्यालय में वे एकेडमिक, एडमिनिस्ट्रेटिव और एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
पशु शल्यक्रिया में विशेष ख्याति
डॉ. तिवारी की पहचान न केवल एक प्रशासक बल्कि एक कुशल सर्जन के रूप में भी है। वे छोटे और बड़े जानवरों की जटिल शल्यक्रिया (Surgery) के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध हैं। पूर्व में उन्हें ‘यूनिवर्सिटी बेस्ट टीचर अवार्ड’, ‘कृषि शिरोमणि अवार्ड’, ‘गौरव रत्न अवार्ड-2022’, ‘ए.के. भार्गव मेमोरियल अवार्ड’ और ‘भारत ज्योति अवार्ड’ जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने दी बधाई
डॉ. तिवारी की इस उपलब्धि पर कामधेनु विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, वर्तमान डीन, डायरेक्टर, वित्त अधिकारी और जनसंपर्क अधिकारी सहित समस्त शिक्षकों ने उन्हें बधाई दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान के लिए गौरव का विषय बताया है।










