

बांदा। बांदा जिले के महुराई गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 16 वर्षीय छात्र विकास ने ‘फ्री फायर’ गेम खेलने से मना करने पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्र की इस त्रासदी ने पूरे इलाके में शोक और सदमे की लहर फैला दी है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है, और पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
महुराई गांव के निवासी आनंद किशोर का 16 वर्षीय पुत्र विकास चित्रकूट जनपद के कर्वी सीआईसी इंटर कॉलेज में कक्षा दसवीं का छात्र था। सुबह के करीब 11 बजे जब उसे स्कूल जाना था, तब वह घर पर ही बैठकर मोबाइल पर ‘फ्री फायर’ गेम खेल रहा था। जब उसकी मां चुनूबादी ने उसे पढ़ाई करने और स्कूल जाने के लिए कहा, तो उसने उनकी बात अनसुनी कर दी। मां ने दोबारा उसे गेम बंद करने के लिए कहा, तो विकास गुस्से में आ गया और साड़ी से छत में लगे पंखे के हुक से फंदा लगा लिया।
कुछ देर बाद जब मां कमरे में गईं, तो वहां उनका बेटा फंदे पर लटका मिला। मां की चीख-पुकार सुनकर अन्य परिजन और पड़ोसी दौड़कर आए और उसे फंदे से नीचे उतारा। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। विकास की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
परिजनों का बयान
ममेरे भाई ललित किशोर ने बताया कि घर में छपाई का काम चल रहा था, जिसके कारण विकास पिछले छह दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहा था। वह अक्सर मोबाइल में ‘फ्री फायर’ गेम खेलने में लगा रहता था। उसकी मां उसे लगातार पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए कहती थीं। ललित के अनुसार, विकास मां को डराने के लिए फंदा लगाने का दिखावा कर रहा था, लेकिन गलती से फंदा कस गया और उसकी जान चली गई।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलने पर बदौसा थाना के प्रभारी जयचंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले की प्रारंभिक जांच के बाद इसे दुर्घटना मानते हुए कागजी कार्रवाई पूरी की। पुलिस का कहना है कि प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि विकास की मौत धोखे से फंदा कसने के कारण हुई है।
परिवार में शोक की लहर
विकास के पिता गुजरात के दमन में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। घटना की सूचना मिलने पर वह तुरंत घर के लिए रवाना हो गए हैं। विकास तीन बहन-भाइयों में सबसे छोटा और सबका लाड़ला था। उसकी बड़ी बहन वंदना और मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
मोबाइल गेम की लत बनी जानलेवा
परिजनों के अनुसार, विकास पिछले कुछ समय से ‘फ्री फायर’ गेम खेलने में अत्यधिक समय बिता रहा था। हालांकि वह पढ़ाई में होशियार था और अपने मिलनसार स्वभाव के कारण दोस्तों और पड़ोसियों में प्रिय था। लेकिन इस गेम की लत ने उसकी जान ले ली, जिससे परिवार के साथ-साथ उसके दोस्तों और पूरे गांव में गहरा शोक व्याप्त है।
इस घटना ने एक बार फिर से मोबाइल गेम्स के खतरों और उनके बच्चों पर पड़ने वाले मानसिक प्रभावों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए और बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना चाहिए।









