16 सितम्बर 2026 |
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बारिश में चप्पल पहन स्कूल पहुंचे छात्र, प्रिंसिपल ने गेट से लौटाया; अभिभावकों ने लगाया अमानवीय व्यवहार का आरोप

OM Darpan

Aug 03, 2025 08:25 am 303 views
बारिश में चप्पल पहन स्कूल पहुंचे छात्र, प्रिंसिपल ने गेट से लौटाया; अभिभावकों ने लगाया अमानवीय व्यवहार का आरोप
कुनकुरी। लोयोला हिंदी माध्यम स्कूल कुनकुरी में बच्चों को चप्पल पहनकर स्कूल आने पर प्राचार्य द्वारा परिसर में प्रवेश नहीं दिए जाने का मामला सामने आया है। लगातार बारिश के कारण बच्चों के जूते गीले हो गए थे, जिस कारण वे मजबूरी में चप्पल पहनकर स्कूल पहुंचे। लेकिन प्रिंसिपल फादर सुशील ने उन्हें स्कूल गेट से ही अंदर जाने से रोक दिया। इस घटना के बाद अभिभावकों में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है।

अभिभावकों का आरोप: अमानवीय व्यवहार

बच्चों के परिजनों ने प्राचार्य के इस फैसले को अमानवीय व्यवहार बताया है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन को बच्चों की परिस्थिति को समझना चाहिए था। बारिश के कारण बच्चों के जूते गीले होना एक सामान्य समस्या है, जिसमें चप्पल पहनकर आना कोई अनुशासनहीनता नहीं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कई बच्चों को स्कूल गेट से ही लौटा दिया गया, जिससे उन्हें मानसिक और शैक्षणिक नुकसान झेलना पड़ा है। अभिभावकों का कहना है कि यह निर्णय व्यवहारिक नहीं है और बच्चों को असुविधा व अपमान का सामना करना पड़ा। चूंकि इस घटना के बाद अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से लिखित में माफ़ी मांगने और दुबारा बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं करने की मांग की है।

प्राचार्य का स्पष्टीकरण: अनुशासन का महत्व

इस मामले में जब स्कूल के प्राचार्य फादर सुशील से बात की गई, तो उन्होंने अपने फैसले का बचाव किया। प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि “हम बच्चों में अनुशासन बनाए रखने के लिए यह नियम लागू करते हैं। यूनिफॉर्म और उचित पहनावा विद्यालय के अनुशासन का एक अनिवार्य हिस्सा है।” उनका तर्क था कि नियम सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होते हैं और यह सिर्फ एक विशेष मामले तक सीमित नहीं है।

शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच

वहीं, इस पूरे मामले पर कुनकुरी विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी मिली है और अब इसकी विस्तृत जांच की जाएगी। शिक्षा अधिकारी के बयान से यह उम्मीद जगी है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जा सकती है, जिससे भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके और बच्चों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके।  
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