नई दिल्ली।
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को बुधवार को संसद की जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) ने मंजूरी दे दी। समिति के 16 सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट किया, जबकि 11 सदस्यों ने इस ड्राफ्ट रिपोर्ट का विरोध किया। अब यह रिपोर्ट गुरुवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सामने पेश की जाएगी, जिसके बाद इस पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
विपक्षी सांसदों ने इस विधेयक पर अपनी गंभीर आपत्तियां जताई हैं। AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि समिति ने 655 पन्नों की रिपोर्ट रातोंरात सांसदों को भेजी, जो कि पढ़ना असंभव था। ओवैसी ने कहा, “मैं असहमत हूं और संसद में इस विधेयक का विरोध करूंगा।”
इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी और नदीमुल हक, DMK के सांसद ए राजा, आप नेता संजय सिंह, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत समेत कई विपक्षी सांसदों ने औपचारिक रूप से अपनी असहमति जताई। समिति के अन्य सदस्य 29 जनवरी तक अपनी असहमति जताने का समय ले सकते हैं।
विपक्ष के आरोप:
कांग्रेस सांसद डॉ. सैयद नसीर हुसैन ने आरोप लगाया कि कई आपत्तियां और सुझाव रिपोर्ट में शामिल नहीं किए गए, और सरकार ने रिपोर्ट को अपनी इच्छानुसार तैयार किया। उनका कहना था कि “यह विधेयक असंवैधानिक संशोधन लाता है और यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाता है।”
कांग्रेस सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद ने इसे “शासक का अहंकार” करार दिया और कहा, “जब कोई निर्वाचित नेता खुद को शासक समझने लगता है, तो वह ऐसे निर्णय लेने लगता है।” शिवसेना (यूबीटी) के सांसद ने भी इस विधेयक को संविधान के खिलाफ बताया।
DMK का सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला:
DMK के सांसद ए राजा ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगी। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तावित कानून असंवैधानिक होगा और समिति के द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ इस कानून को चुनौती देने में मदद करेंगे।
विधेयक का इतिहास:
सदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने 8 अगस्त 2024 को वक्फ विधेयक को लोकसभा में पेश किया था। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे मुस्लिम विरोधी करार दिया था। इसके बाद, यह विधेयक लोकसभा में बिना किसी चर्चा के JPC को भेजा गया था। जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की पहली बैठक 22 अगस्त 2024 को आयोजित हुई थी।










