14 सितम्बर 2026 |
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एक देश, एक चुनाव: लोकतंत्र की दिशा में एक निर्णायक कदम: अशवंत तुषार साहू

OM Darpan

May 06, 2025 06:41 am 261 views
एक देश, एक चुनाव: लोकतंत्र की दिशा में एक निर्णायक कदम: अशवंत तुषार साहू

महासमुंद:

भाजपा के किसान नेता अशवंत तुषार साहू ने "एक देश, एक चुनाव" के प्रस्ताव को लोकतंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले चुनाव न केवल देश के विकास को बाधित करते हैं, बल्कि जनकल्याण की योजनाओं में भी रुकावट डालते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन दशकों में कोई ऐसा साल नहीं रहा जब किसी राज्य में चुनाव न हुए हों, जो देश की प्रगति में गति को धीमा करता है।

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समय और संसाधनों की बचत के लिए एक साथ चुनाव
तुषार साहू ने जोर दिया कि एक साथ चुनाव आयोजित करने से न केवल चुनावी खर्चों में भारी कमी आएगी, बल्कि प्रशासन पर भी कम दबाव होगा। उनका कहना है, "चुनावों के दौरान होने वाली अनावश्यक राजनीतिक गतिविधियाँ और प्रचार प्रदूषण से पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाते हैं। एक साथ चुनाव से इस प्रदूषण में कमी आएगी और समय की भी बचत होगी।"

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
तुषार साहू ने यह भी बताया कि यदि 2024 में एक साथ चुनाव होते तो इससे देश की जीडीपी में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती थी, जो करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये के बराबर होता। इसके अलावा, चुनावी खर्च में 30-35% की कमी आने की संभावना है। प्रत्येक राज्य के विधानसभा चुनावों पर औसतन 5000 से 10,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

बड़ी संख्या में संसाधनों की आवश्यकता
हालांकि, तुषार साहू ने यह भी कहा कि एक साथ चुनावों के लिए बड़ी संख्या में ईवीएम, सुरक्षाकर्मियों, और चुनावी कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। भारत में 10 लाख से ज्यादा मतदान केंद्र हैं, जिनके लिए लगभग 20 लाख ईवीएम सेट की जरूरत होगी। इसके बावजूद, उनका मानना है कि यह खर्च और संसाधन लंबे समय में संसाधनों की बचत करने में मदद करेंगे।

अधिक जिम्मेदारी और सरकार की जवाबदेही
तुषार साहू का मानना है कि एक साथ चुनाव होने से सरकार को पांच साल का स्पष्ट समय मिलेगा, जिससे विकास कार्यों में कोई रुकावट नहीं आएगी। इससे परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकेंगी और लोगों को शीघ्र लाभ मिल सकेगा।

समाज पर सकारात्मक प्रभाव
अंत में, तुषार साहू ने यह कहा कि चुनावों के कारण सरकारी कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी पर लगाया जाता है, जिससे उनकी रोज़मर्रा की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। एक साथ चुनाव होने से यह समस्या हल हो जाएगी और प्रशासनिक कार्य आसानी से चलते रहेंगे।

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