दुर्ग (ओमदर्पण न्यूज़)।
शहर के प्रमुख एवं ऐतिहासिक जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर नगर पालिक निगम सख्त रुख अपना रहा है। सोमवार को महापौर अलका बाघमार ने निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत डोंगिया बांधा और हत्यारा खाई तालाब का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तालाबों में चल रहे जलकुंभी सफाई अभियान का जायजा लिया और जल निकासी मार्गों पर हुए अवैध कब्जों को तत्काल हटाने के कड़े निर्देश अधिकारियों को दिए।
निरीक्षण के दौरान वार्ड क्रमांक 2 और 4 में जल कार्य प्रभारी लीना दिनेश देवांगन, लोककर्म प्रभारी देव नारायण चंद्राकर, शेखर चन्द्राकर, वार्ड 2 पार्षद गोविंद देवांगन, पार्षद रंजिता पाटिल, ममता देवांगन और मंडल महामंत्री नवीन साहू सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
मशीनों से हो रही सफाई, दिखने लगा तालाब का स्वरूप
नगर निगम द्वारा पौंड क्लीनर मशीन के माध्यम से डोंगिया बांधा तालाब की तेजी से सफाई की जा रही है। पिछले एक सप्ताह से चल रहे इस अभियान के कारण अब तालाब का स्वरूप साफ और व्यवस्थित दिखाई देने लगा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में संतोष है। ज्ञात हो कि तालाब में फैली जलकुंभी की समस्या को लेकर एम.आई.सी. सदस्य लीना दिनेश देवांगन और पार्षद गोविंद देवांगन द्वारा लगातार इसकी सफाई की मांग की जा रही थी।
निकास मार्ग पर अवैध कब्जों पर कार्रवाई तय
महापौर अलका बाघमार ने तालाब के निकास क्षेत्र, विशेषकर नया पारा स्थित साहू सदन के पास की स्थिति का बारीकी से मुआयना किया। यहां निकास मार्ग पर हुए अवैध कब्जों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने अधिकारियों को इन्हें तत्काल हटाने के सख्त निर्देश दिए। महापौर ने स्पष्ट किया कि इन अवरोधों के कारण बरसात के दौरान तालाब के ओवरफ्लो होने पर पानी की निकासी बाधित होती है, जिससे बस्तियों में जलभराव का खतरा रहता है।
इसके अलावा महापौर ने राजीव नगर स्थित ‘हत्यारा खाई’ तालाब का भी निरीक्षण किया। वहां भी जलभराव की स्थिति को रोकने के लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अवैध निर्माण हटाने और जल निकासी व्यवस्था को सुचारू करने के निर्देश दिए गए हैं।
जल प्रबंधन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है डोंगिया बांधा
महापौर ने बताया कि डोंगिया बांधा तालाब शहर के जल प्रबंधन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यह ‘एल’ (L) आकार का तालाब लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबाई में फैला है। इसका विस्तार गया नगर (वार्ड 4) और राजीव नगर (वार्ड 2) से होते हुए बघेरा (वार्ड 56) तक है। इस विशाल तालाब में गिरधारी नाला सहित 15 से अधिक वार्डों का पानी आकर मिलता है, जिसके कारण इसकी नियमित सफाई और संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो जाता है।







