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सेनाध्यक्ष ने यूएई और श्रीलंका में मजबूत की रणनीतिक साझेदारी

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OM Darpan

Jan 10, 2026 12:20 am 572 views
सेनाध्यक्ष ने यूएई और श्रीलंका में मजबूत की रणनीतिक साझेदारी

India UAE Defence ties 2026

नई दिल्लीएजेंसी  

भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 5 से 8 जनवरी 2026 तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और श्रीलंका की अपनी चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस कूटनीतिक दौरे का उद्देश्य पश्चिम एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ को मजबूत करना और मित्र देशों के साथ सैन्य तालमेल को नए आयाम देना था।

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यूएई दौरा: भविष्य की चुनौतियों पर मंथन (5-6 जनवरी)

जनरल द्विवेदी ने अपने दौरे के पहले चरण में 5 और 6 जनवरी को संयुक्त अरब अमीरात में वहां के थल सेना कमांडर और सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व के साथ मैराथन बैठकें कीं। इस दौरान दोनों देशों के बीच इंटर-ऑपरेबिलिटी (अंतर-संचालनीयता) बढ़ाने और संयुक्त प्रशिक्षण पर सहमति बनी।

सेनाध्यक्ष ने यूएई के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों का जायजा लिया और वहां की संगठनात्मक संरचना को समझा। उन्होंने यूएई के 'नेशनल डिफेंस कॉलेज' में अधिकारियों को संबोधित करते हुए नेतृत्व क्षमता और ग्लोबल सिक्योरिटी पर भारत का दृष्टिकोण रखा। इस दौरान भारतीय राजदूत डॉ. दीपक मित्तल के साथ रक्षा कूटनीति के अहम पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

श्रीलंका दौरा: मदद का हाथ और पुराना साथ (7-8 जनवरी)

दौरे के दूसरे चरण में 7 से 8 जनवरी तक सेनाध्यक्ष श्रीलंका में रहे। यहाँ उन्होंने 'नेबरहुड फर्स्ट' की नीति को आगे बढ़ाते हुए श्रीलंकाई सेना को 20 महिंद्रा स्कॉर्पियो वाहन, सिमुलेटर और एक एम्बुलेंस वैन औपचारिक रूप से सौंपी। उन्होंने बत्तला स्थित 'आर्मी वॉर कॉलेज' में एक खेल परिसर की आधारशिला भी रखी।

जनरल द्विवेदी ने श्रीलंकाई सेना कमांडर, रक्षा उप मंत्री और रक्षा सचिव के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं। 'रक्षा सेवा कमान एवं स्टाफ कॉलेज' (DSCSC) में संबोधन के दौरान उन्होंने श्रीलंका की रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

भावुक क्षण तब आया जब जनरल द्विवेदी ने 'इंडियन पीस कीपिंग फोर्स' (IPKF) युद्ध स्मारक पर जाकर भारतीय वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया। अपनी यात्रा के समापन पर उन्होंने कोलंबो में भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा से भी मुलाकात की।

इस दौरे ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए 'विश्वसनीय रक्षा भागीदार' के रूप में भारत की छवि को और पुख्ता किया है।

 
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