14 सितम्बर 2026 |
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चुनाव 2026: फेक न्यूज और भ्रामक AI कंटेंट पर चुनाव आयोग सख्त, 11 हजार से ज्यादा पोस्ट पर कार्रवाई

OM Darpan

Apr 19, 2026 11:17 pm 275 views
चुनाव 2026: फेक न्यूज और भ्रामक AI कंटेंट पर चुनाव आयोग सख्त, 11 हजार से ज्यादा पोस्ट पर कार्रवाई

नई दिल्ली।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आम चुनाव और उपचुनाव 2026 के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली भ्रामक और गैरकानूनी सामग्री पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी हितधारकों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, आईटी नियम 2021 और आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का सख्ती से पालन करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारी से उपयोग करना होगा।

AI जनित सामग्री पर 3 घंटे के भीतर एक्शन अनिवार्य

डीपफेक और भ्रामक जानकारी को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने सख्त नियम लागू किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया है कि एआई (AI) द्वारा बनाए गए या हेरफेर किए गए किसी भी गैरकानूनी कंटेंट की शिकायत मिलने के 3 घंटे के भीतर उस पर कार्रवाई की जाए।

राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए भी नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं:

  • प्रचार के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी भी एआई-संशोधित कंटेंट पर स्पष्ट रूप से "एआई-जनित", "डिजिटल रूप से संवर्धित" या "कृत्रिम सामग्री" का लेबल लगाना अनिवार्य है।

  • पारदर्शिता और मतदाताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए कंटेंट बनाने वाली मूल संस्था (क्रिएटर) का खुलासा करना भी जरूरी है।

11 हजार से अधिक पोस्ट पर गिरी गाज

असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों में सोशल मीडिया की कड़ी निगरानी की जा रही है। एमसीसी का उल्लंघन करने वाले, कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले या मतदान प्रक्रिया के खिलाफ अफवाह फैलाने वाले पोस्ट सीधे रडार पर हैं।

  • 15 मार्च 2026 को चुनावों की घोषणा के बाद से अब तक 11 हजार से अधिक आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और यूआरएल (URLs) की पहचान की गई है।

  • इन पर राज्य के आईटी नोडल अधिकारियों द्वारा कंटेंट हटाने, एफआईआर (FIR) दर्ज करने और खंडन जारी करने जैसी सख्त कार्रवाइयां की गई हैं।

48 घंटे का 'साइलेंस पीरियड'

आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के प्रावधानों को दोहराया है। इसके तहत मतदान समाप्त होने से पहले के 48 घंटों (मौन अवधि) के दौरान चुनाव वाले क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की चुनावी सामग्री का प्रदर्शन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यह नियम टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी समान रूप से लागू होता है।

सी-विजिल (C-VIGIL) ऐप का असर: 100 मिनट में हो रहा समाधान

चुनावों में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट करने के लिए ईसीआई द्वारा बनाए गए 'सी-विजिल' मॉड्यूल का नागरिक, राजनीतिक दल और उम्मीदवार जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

  • 15 मार्च से 19 अप्रैल के बीच ऐप के माध्यम से कुल 3,23,099 शिकायतें दर्ज की गईं।

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  • चुनाव आयोग की त्वरित कार्रवाई के चलते इनमें से 3,10,393 शिकायतों (लगभग 96.01 प्रतिशत) का समाधान निर्धारित 100 मिनट की समयावधि के भीतर कर दिया गया।

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