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कुलपति और कुलसचिव को सौंपा ज्ञापन
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डॉ. नमिता ब्रम्हे और डॉ. रविन्द्र कुमार ब्रम्हे की नियुक्ति पर उठाए सवाल, उच्च स्तरीय जांच की मांग
रायपुर.
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU) में प्राध्यापकों की नियुक्ति में कथित फर्जीवाड़े को लेकर एनएसयूआई ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को एनएसयूआई रायपुर जिला अध्यक्ष शान्तनु झा के नेतृत्व में संगठन ने कुलपति और कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने विश्वविद्यालय में हो रही नियुक्तियों को ‘बंटी-बबली मॉडल’ करार देते हुए डॉ. नमिता ब्रम्हे (भौतिकी) और डॉ. रविन्द्र कुमार ब्रम्हे (अर्थशास्त्र) की नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं और तत्काल सेवा समाप्ति की मांग की है।
पति-पत्नी पर आरक्षित पदों पर कब्जे का आरोप
एनएसयूआई ने ज्ञापन में आरोप लगाया है कि यह मामला केवल एक नियुक्ति तक सीमित नहीं है। संगठन का दावा है कि ‘बंटी-बबली मॉडल’ की तर्ज पर पति-पत्नी (ब्रम्हे दंपती) ने नियमों को ताक पर रखकर आरक्षित पदों पर कब्जा किया है। संगठन के मुताबिक, पहले डॉ. रविन्द्र कुमार ब्रम्हे (अर्थशास्त्र) के दस्तावेजों पर सवाल उठे थे और अब डॉ. नमिता ब्रम्हे की नियुक्ति भी संदेह के घेरे में है।
21 साल से नहीं हुआ जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन
जिला अध्यक्ष शान्तनु झा ने बताया कि डॉ. नमिता ब्रम्हे की नियुक्ति वर्ष 2004 में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित पद पर हुई थी। आरोप है कि उनका जाति प्रमाण पत्र पिता या पूर्वजों के दस्तावेजों के बजाय पति के अस्थायी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर बनवाया गया प्रतीत होता है, जिसकी वैधता भी समाप्त हो चुकी थी। एनएसयूआई ने सवाल उठाया कि 21 साल बीत जाने के बाद भी आज तक जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन क्यों नहीं हो पाया है, जबकि दोनों पति-पत्नी लगातार पदों पर बने हुए हैं।
शासन के 11 आदेशों के बाद भी कार्रवाई नहीं
ज्ञापन में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। एनएसयूआई का आरोप है कि वर्ष 2007 से लेकर 2021 तक शासन द्वारा इस संबंध में 11 आदेश और परिपत्र जारी किए गए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन ने जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की। छात्र संगठन ने इसे संरक्षण, मिलीभगत और भ्रष्टाचार का संकेत बताया है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
एनएसयूआई ने स्पष्ट किया है कि यह मुद्दा आरक्षित वर्ग के वास्तविक हकदार युवाओं के अधिकारों से जुड़ा है। संगठन ने मांग की है कि दोनों प्रकरणों की राज्य स्तरीय उच्च जांच कराई जाए और दोष सिद्ध होने पर तत्काल सेवा समाप्ति के साथ दंडात्मक कार्रवाई हो। साथ ही, फर्जी नियुक्तियों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी एक्शन लिया जाए। शान्तनु झा ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कठोर कदम नहीं उठाए, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।











