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आयोग के निर्देश पर 6 माह का का बकाया वेतन 1 लाख 85 हजार रू. आवेदिका को मिला।

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सत्यानंद सोई बिरगांव

रायपुर/बीरगांव

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्यगण श्रीमती नीता विश्वकर्मा व श्रीमती बालो बघेल ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आज 252 वीं सुनवाई हुई। रायपुर जिले में कुल 124 वीं जनसुनवाई।

आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में अनावेदिका को दिनांक 04/04/2024 से नारी निकेतन रायपुर में आयोग के द्वारा सुरक्षा की दृष्टिकोण से भेजी गई थी। उसके परिवार से अब तक किसी ने शपथ पत्र नही दिया था। अनावेदिका की मां ने शपथ पत्र दिया, उनके द्वारा आश्वासन दिया गया कि अनावेदिका व उसका पति कोरबा के परिवार न्यायालय में आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया प्रारंभ करेंगे और तलाक की प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात् उभय पक्ष आपस में विवाह के सामान का आदान प्रदान करेंगे। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

आयोग में प्रकरण प्रस्तुत होते ही उभय पक्षों के मध्य विवाद का निराकरण हो चुका है व आवेदिका को 6 माह के मातृत्व अवकाश के वेतन का 1 लाख 85. 767 रू. अनावेदक के द्वारा आवेदिका को दिया जा चुका है। ऐसी स्थिति में प्रकरण का उद्देश्य पूर्ण हो चुका है। अतः प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के विरूध्द शिकायत प्रस्तुत किया था, लेकिन सुनवाई के दौरान अनावेदक ने यह बताया कि आवेदिका के द्वारा अनावेदक के विरूध्द धारा 376 व 506 का अपराध दर्ज कर दिया है। जिसमें अनावेदक 13 दिन जेल में रहा है और जमानत पर रिहा हुआ है। चूंकिप्रकरण न्यायालय में लंबित है अतः आयोग में सुना जाना औचित्यहीन होने से प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

एक अन्य प्रकरण में दोनों पक्षों को सुने जाने के दौरान यह पता चला कि अनावेदक के उपर सर्टिफिकेट कैंसल होने का प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में लंबित है ऐसी दशा में प्रकरण को आगे जारी रखना संभव नहीं है। इस स्तर पर आवेदिका ने कहा कि उसे 1 महिने का वेतन नहीं मिला है। जिसे अनावेदक ने देना स्वीकार किया गया और आवेदिका का सामान देने के बाद आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाने पर प्रकरण नस्तीबध्द किया जायेगा।

अन्य प्रकरण में दोनो पक्षों की काउंसलिंग के बाद दोनों पक्ष तलाक के लिए सहमत है। अनावेदक ने बताया कि उन्होंने रायपुर कोर्ट में तलाक के लिए आवेदन लगा दिया है। प्रकरण न्यायालय में होने के कारण आयोग से प्रकरण नस्तीबध्द किया जाता है।

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