30 सितम्बर 2026 |
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INDIA गठबंधन: विपक्षी दलों की दिल्ली में तीन घंटे मंथन, 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में प्रदर्शन का ऐलान; सपा, आप और टीवीके ने बनाई दूरी

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OM Darpan

Oct 01, 2026 04:58 am 1,052 views
INDIA गठबंधन: विपक्षी दलों की दिल्ली में तीन घंटे मंथन, 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में प्रदर्शन का ऐलान; सपा, आप और टीवीके ने बनाई दूरी

नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन INDIA की तीन घंटे चली बैठक में आगामी रणनीति पर सहमति बनी। गठबंधन ने चुनाव आयोग, SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर के जिलों में रैलियां और प्रदर्शन करने का फैसला किया है।

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बैठक में 6 अक्टूबर को सांसदों का चुनाव आयोग तक मार्च निकालने, अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में राष्ट्रपति से मुलाकात करने और 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही देशभर में पांच मेगा रैलियां करने, सुप्रीम कोर्ट में लंबित चुनाव संबंधी याचिकाओं के जल्द निपटारे, पुरानी मतदाता सूची और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई गई।


सहयोगी दलों ने कांग्रेस को दी सलाह

बैठक में शामिल तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी बात रखी। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस की 'एकला चलो' नीति पर सवाल उठाते हुए सहयोगी दलों को अभियानों में शामिल करने की बात कही। ठाकरे ने 4 अक्टूबर को मुंबई में होने वाली बैठक के लिए INDIA गठबंधन के नेताओं को आमंत्रित किया।

सपा सांसद हरेन्द्र मलिक ने कहा कि कांग्रेस को 'बड़े भाई' जैसा दिल दिखाना होगा और त्याग करना सीखना होगा।


कई दलों ने बनाई दूरी

बैठक में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव शामिल नहीं हुए। इसके अलावा तमिलनाडु में उपचुनाव प्रचार का हवाला देकर टीवीके (अभिनेता विजय की पार्टी) के प्रतिनिधि भी बैठक में नहीं पहुंचे। एमडीएमके से वाईके और वीसीके के प्रतिनिधि शामिल हुए, जबकि डीएमके ने पहले ही दूरी बना ली थी।

आम आदमी पार्टी ने भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया, हालांकि संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के मुद्दे पर समर्थन देने की बात कही है।

नए सहयोगियों को जोड़ने पर मंथन

बैठक में बीजू जनता दल (बीजद), बीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस जैसे गैर-भाजपा दलों को साथ लाने पर चर्चा हुई। हालांकि, राज्यों में क्षेत्रीय समीकरणों के कारण कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनी हुई है।

चुनाव आयोग से जुड़ी नई जानकारियों के सामने आने के बाद गठबंधन के घटक दल एक बार फिर आंदोलनों के जरिए एकजुट होकर सक्रिय होने की रणनीति बना रहे हैं।

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