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हाईकोर्ट ने पलारी कॉलेज के सहायक प्राध्यापक का निलंबन किया रद्द , बताया दुर्भावनापूर्ण

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OM Darpan

Sep 30, 2025 11:05 pm 295 views
हाईकोर्ट ने पलारी कॉलेज के सहायक प्राध्यापक का निलंबन किया रद्द , बताया दुर्भावनापूर्ण
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में शासकीय बृजलाल वर्मा महाविद्यालय पलारी के सहायक प्राध्यापक कमलेश दुबे के निलंबन आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने इस निलंबन को 'अवैध' और 'दुर्भावनापूर्ण' करार दिया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह निलंबन 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन' था और यह कार्यवाही न केवल सेवा नियमों के विरुद्ध थी, बल्कि समाज में व्यक्ति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली भी थी।

23 साल की निष्कलंक सेवा के बाद निलंबन

याचिकाकर्ता कमलेश दुबे सहायक प्राध्यापक के रूप में महाविद्यालय में लगभग 23 वर्षों से सेवा दे रहे थे और उनका सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह निष्कलंक था। यह मामला 2015 का है, जब 11 सितंबर 2015 को कॉलेज में कंप्यूटर शिक्षक के पद पर नियमित नियुक्ति के कारण मानदेय पर कार्यरत प्रीति साहू को कार्यमुक्त कर दिया गया। इसके तुरंत बाद कॉलेज में छात्रों के एक वर्ग द्वारा आंदोलन शुरू कर दिया गया, जिसमें प्रीति साहू की पुनर्नियुक्ति की मांग की गई थी।

छात्र संघ का ज्ञापन और शिकायतें

17 सितंबर 2015 को छात्र संघ ने कॉलेज प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कॉलेज की मूलभूत सुविधाओं जैसे वाई-फाई, कैंटीन, स्वच्छता और जल आपूर्ति की शिकायतें दर्ज थीं। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया था कि प्रीति साहू को व्यक्तिगत द्वेष के चलते हटाया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस ज्ञापन में सहायक प्राध्यापक कमलेश दुबे के विरुद्ध कोई शिकायत दर्ज नहीं थी।

अखबार की खबर और एकपक्षीय जांच

ज्ञापन सौंपे जाने के कुछ ही दिन बाद, एक स्थानीय अखबार में खबर प्रकाशित हुई, जिसमें याचिकाकर्ता पर छात्राओं से दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए गए। इस खबर के तुरंत बाद, 21 सितंबर 2015 को कॉलेज प्रशासन ने एक एकपक्षीय जांच की, जिसमें कुछ छात्राओं के बयान दर्ज किए गए। याचिकाकर्ता को कोई नोटिस दिए बिना या उनका पक्ष जाने बिना, इसी एकपक्षीय रिपोर्ट के आधार पर 23 सितंबर 2015 को निलंबन आदेश जारी कर दिया गया।

अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी की दलीलें

याचिकाकर्ता कमलेश दुबे की ओर से अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने प्रकरण की पैरवी की। उन्होंने दलील दी कि यह पूरा घटनाक्रम पूर्व नियोजित और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होता है। अधिवक्ता ने बताया कि न तो किसी छात्रा ने पूर्व में कोई शिकायत की थी और न ही प्रीति साहू ने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी कोई बात उठाई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अखबार में छपी खबर को आधार बनाकर व्यक्ति की छवि खराब करना और उसके आधार पर निलंबन जैसी सख्त कार्यवाही करना पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक है। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए सहायक प्राध्यापक का निलंबन रद्द कर दिया।
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