अक्टूबर-दिसंबर में रेपो रेट 0.50% तक बढ़ा सकता है RBI
OM Darpan
दो बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी की संभावना, टर्मिनल रेट 5.75% तक पहुंचने का अनुमान
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी व महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा की रिपोर्ट में अक्टूबर और दिसंबर 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। दोनों बैठकों में ऐसा होने पर रेपो रेट कुल 0.50 प्रतिशत बढ़ सकता है।
रेपो रेट बढ़ने की स्थिति में बैंकों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है। इसका असर नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों के साथ कुछ मौजूदा फ्लोटिंग-रेट लोन पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI प्रभावित हो सकती है।
टर्मिनल रेट 5.75 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान
नोमुरा के मुताबिक, अक्टूबर और दिसंबर की दोनों नीति बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होने पर RBI का टर्मिनल रेट 5.75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। हालांकि रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोनों बैठकों में दर बढ़ना तय नहीं है। केवल एक बार बढ़ोतरी होने की संभावना भी बनी हुई है।
यानी 50 बेसिस पॉइंट की संभावित वृद्धि फिलहाल नोमुरा का अनुमान है। ब्याज दरों पर अंतिम फैसला RBI की मौद्रिक नीति समिति आर्थिक आंकड़ों, महंगाई, विकास दर तथा अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करेगी।
इससे पहले RBI नीतिगत दरों में कुल करीब 1.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। इसके बाद कुछ समय से ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया गया है।
कच्चा तेल महंगा होने से महंगाई पर दबाव की आशंका
नोमुरा के अनुमान के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और उससे महंगाई पर पड़ने वाला संभावित दबाव प्रमुख वजहों में शामिल है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर आयात बिल तथा घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई नियंत्रित रखने के साथ आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देने का संतुलन बनाए रखने की चुनौती रहती है।
नोमुरा ने फरवरी 2027 के बाद ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावना कम रहने का अनुमान लगाया है। इसके पीछे अगले वर्ष उपभोक्ता खर्च में संभावित कमी तथा महंगाई के नरम रहने की संभावना बताई गई है।
अक्टूबर और दिसंबर में दरें बढ़ती हैं तो कर्ज की ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है, लेकिन EMI में वास्तविक बदलाव बैंक और लोन की ब्याज दर की प्रकृति पर निर्भर करेगा। फिक्स्ड ब्याज दर वाले कर्ज पर तत्काल असर जरूरी नहीं है। ऐसे में 0.50 प्रतिशत की संभावित बढ़ोतरी को फिलहाल अनुमान के रूप में ही देखा जा रहा है, RBI के अंतिम फैसले के रूप में नहीं।
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