मोहला वनमंडल में 218 किसानों ने रोपे 1.14 लाख पौधे, हरियाली के साथ मुनाफे की तैयारी
OM Darpan

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 188.04 एकड़ निजी भूमि पर हुआ पौधरोपण
क्लोन नीलगिरी के प्रति दिखा सबसे ज्यादा रुझान
मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की किसान वृक्ष मित्र योजना मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के मोहला वनमंडल में किसानों के लिए अतिरिक्त आय का नया जरिया बन रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान जिले के 218 किसानों ने अपनी 188.04 एकड़ निजी भूमि पर कुल 1 लाख 14 हजार 220 पौधों का रोपण किया है। इस योजना के जरिए जहां एक ओर हरित क्षेत्र का विस्तार हो रहा है, वहीं किसानों को भविष्य में बड़ी आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पूरी सब्सिडी के साथ मुफ्त तकनीकी मदद
योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसानों को उनकी निजी भूमि पर वाणिज्यिक प्रजातियों के पौधरोपण के लिए वन विभाग द्वारा 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। किसानों पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ता, क्योंकि विभाग द्वारा पौधों के साथ-साथ खाद, कीटनाशक और तकनीकी मार्गदर्शन भी पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। वन विभाग ने बीट स्तर पर सभी रोपण स्थलों का सत्यापन भी पूरा कर लिया है।
क्लोन नीलगिरी बनी किसानों की पहली पसंद
आंकड़ों के मुताबिक, क्लोन नीलगिरी किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय प्रजाति बनकर उभरी है। कुल पौधरोपण में इसकी हिस्सेदारी लगभग 78 प्रतिशत है। इस साल 120 किसानों ने 100 एकड़ में 90 हजार क्लोन नीलगिरी के पौधे लगाए हैं। प्रति एकड़ लगभग 900 पौधों की सघनता और 4 से 5 साल में पेपर मिलों द्वारा बायबैक की व्यवस्था के कारण किसानों का रुझान इसकी ओर बढ़ा है।
बांस, चंदन और मालाबार नीम की खेती
नीलगिरी के अलावा अन्य प्रजातियों में भी किसानों ने रुचि दिखाई है। जिले में 55 किसानों ने 26.60 एकड़ में 8 हजार साधारण बांस, 2 किसानों ने 1.56 एकड़ में 250 चंदन और एक किसान ने 2 एकड़ में 1,500 मिलिया डुबिया (मालाबार नीम) के पौधे रोपे हैं।
टिश्यू कल्चर सागौन का बढ़ रहा क्रेज
सागौन वर्ग में इस वर्ष 40 किसानों ने 57.88 एकड़ में कुल 14 हजार 470 पौधों का रोपण किया है। इनमें से 38 किसानों ने 47.88 एकड़ में साधारण सागौन लगाया है, जबकि 2 किसानों ने 10 एकड़ में 2,500 टिश्यू कल्चर सागौन का रोपण किया है। कम समय में बेहतर बढ़वार और गुणवत्तापूर्ण तने की वजह से टिश्यू कल्चर सागौन के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ा है, जिसे वन विभाग डेमो प्लांट के रूप में भी प्रमोट कर रहा है।
योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की निजी भूमि पर ऐसी प्रजातियां उगाना है जिनका वाणिज्यिक उपयोग हो सके। सहयोगी संस्थाओं और निजी कंपनियों के जरिए उत्पाद खरीदने (बायबैक) की व्यवस्था की गई है। इससे भविष्य में किसानों को उनकी उपज के लिए तैयार बाजार मिलेगा। इस पहल से काष्ठ एवं प्लाईवुड उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित होगा और शासन के राजस्व में भी बढ़ोत्तरी होगी।
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