15 सितम्बर 2026 |
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जशपुर के 6 गांवों में बनेंगे 30 होमस्टे, 1.80 करोड़ की परियोजना मंजूर

OM Darpan

Sep 15, 2026 11:39 pm 676 views
जशपुर के 6 गांवों में बनेंगे 30 होमस्टे, 1.80 करोड़ की परियोजना मंजूर

जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में जनजातीय पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बड़ी पहल की गई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA) के तहत बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से जनजातीय अंचल के गांवों में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के साथ स्थानीय परिवारों को सीधे जोड़ा जाएगा।

परियोजना के तहत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ गांवों का चयन किया गया है। इन 6 जनजातीय गांवों में कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक गांव में 5 होमस्टे तैयार करने का प्रस्ताव है। इस पूरे क्लस्टर के विकास पर लगभग 1.80 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसमें होमस्टे निर्माण के साथ गांव स्तर पर आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के विकास का भी प्रावधान है।

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हर गांव में सामुदायिक सुविधाओं पर खर्च होंगे 5 लाख

प्रस्तावित होमस्टे स्थानीय परिवेश और पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर की सुविधाओं के लिए 5 लाख रुपए तक के कार्य प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलने के साथ गांवों में सामूहिक उपयोग की आधारभूत सुविधाएं भी विकसित होंगी। इससे पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचेगा।

कैलाश गुफा और बादलखोल अभयारण्य के पास ठहर सकेंगे पर्यटक

क्लस्टर का चयन क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को देखकर किया गया है। प्रस्तावित गांव बगीचा और जशपुर नगर के साथ-साथ कैलाश गुफा, खुड़िया रानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़ और लोरोघाट जैसे प्राकृतिक स्थलों के निकट हैं। होमस्टे सुविधा विकसित होने से पर्यटकों के लिए इन क्षेत्रों में ठहरने के बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे और उनके रुकने की अवधि भी बढ़ेगी।

युवाओं और महिलाओं को मिलेगा गाइडिंग और हस्तशिल्प में रोजगार

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, इस परियोजना से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को आतिथ्य सेवा, स्थानीय व्यंजन, पर्यटक गाइड, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने बताया कि यह मॉडल स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को एक साथ जोड़ेगा, जिससे जनजातीय परिवारों के लिए स्थायी आय के नए स्रोत विकसित होंगे।

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