21 सितम्बर 2026 |
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पशुपालन से संवरी अश्वनी की तकदीर, गोट फार्म के लिए केंद्र सरकार ने दिए 10 लाख रुपए

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OM Darpan

Jul 20, 2026 02:05 am 431 views
पशुपालन से संवरी अश्वनी की तकदीर, गोट फार्म के लिए केंद्र सरकार ने दिए 10 लाख रुपए
     

धमतरी। 

छत्तीसगढ़ में कृषि और पशुपालन को आय का मुख्य जरिया बनाने के मुख्यमंत्री के संकल्प को नेशनल लाइवस्टॉक मिशन धरातल पर उतार रहा है। धमतरी जिले के विकासखंड धमतरी के ग्राम भटगांव निवासी प्रगतिशील पशुपालक अश्वनी ध्रुव की सफलता आज प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। अश्वनी ने बकरी पालन को परंपरागत घाटे के सौदे से बाहर निकालकर एक आधुनिक और मुनाफेदार बिजनेस मॉडल में तब्दील कर दिया है। उन्होंने ग्राम विश्रामपुर में करीब 20 लाख रुपये की लागत से एक सर्वसुविधायुक्त गोट फार्म की स्थापना की है।

20 लाख का निवेश और 10 लाख की सरकारी मदद

अश्वनी ध्रुव ने अपने फार्म के लिए 100 उन्नत नस्ल की बकरियां और 5 उच्च गुणवत्ता वाले बकरे खरीदे हैं। नेशनल लाइवस्टॉक मिशन के तहत इस परियोजना पर सरकार द्वारा 50 प्रतिशत यानी कुल 10 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। अश्वनी को पहली किस्त के रूप में 5 लाख रुपये प्राप्त हो चुके हैं, जबकि पशुओं के क्रय और स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शेष 5 लाख रुपये की दूसरी किस्त भी जल्द जारी कर दी जाएगी।

डॉ. मरकाम की निगरानी में हुआ 105 बकरियों का बीमा

पशुपालन के जोखिम को कम करने के लिए विभागीय मुस्तैदी के साथ शत-प्रतिशत बीमा कराया गया है। 17 जुलाई 2026 को पशुधन विकास विभाग की उच्च स्तरीय टीम और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि विश्रामपुर पहुंचे। उपसंचालक डॉ. अवधेश कुमार मरकाम, विकासखंड प्रभारी डॉ. सुरेंद्र कुमार मरकाम, डॉ. प्रमोद ठाकुर और बजाज इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सभी 105 पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका बीमा सुनिश्चित किया गया। वहीं, सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी प्रेम लाल साहू ने सभी बकरियों की यूनिक पहचान के लिए टैगिंग का कार्य संपन्न किया।

नस्ल सुधार से बढ़ेगी इलाके के किसानों की आय

पशुधन विकास विभाग के डॉक्टरों ने अश्वनी को वैज्ञानिक प्रबंधन के गुर सिखाए हैं, जिसमें कम लागत में वजन बढ़ाने और बीमारियों से बचाव के तरीके शामिल हैं। इस आधुनिक यूनिट का लाभ आसपास के ग्रामीणों को भी मिलेगा, क्योंकि उन्नत नस्ल के बकरों से स्थानीय बकरियों का नस्ल सुधार होगा। जिले में अब तक 3 बकरी पालन और 2 मुर्गी पालन इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है। जिला प्रशासन और विभाग का उद्देश्य युवाओं को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक पशुपालन स्टार्टअप से जोड़ना है।

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