23 सितम्बर 2026 |
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दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल में पहली बार जुटे ग्रामीण, धमाकों के डर को पीछे छोड़ सुनी प्रधानमंत्री के मन की बात

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OM Darpan

Aug 31, 2026 04:01 am 1,029 views
दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल में पहली बार जुटे ग्रामीण, धमाकों के डर को पीछे छोड़ सुनी प्रधानमंत्री के मन की बात
✍️ विशेष संवाददाता छिंदनार (दंतेवाड़ा) | नक्सलवाद के साये से बाहर निकलते बस्तर में बदलाव की एक नई बयार बह रही है। दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में आज एक सुखद नजारा देखने को मिला, जहां ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण पूरे देश के साथ सुना। छिंदनार के इतिहास में यह पहली बार था जब पूरा गांव प्रधानमंत्री के विचारों को सुनने के लिए एक जगह एकत्र हुआ था। ग्रामीणों में इस कार्यक्रम को लेकर अभूतपूर्व उत्साह नजर आया और सभी ने बेहद तल्लीनता से प्रधानमंत्री की बातों को सुना।

नेताओं और ग्रामीणों ने साथ सुना प्रसारण

छिंदनार में आज का माहौल सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग और ऊर्जा से भरा था। कई ग्रामीणों के लिए नरेन्द्र मोदी को सुनने का यह पहला अवसर था। इस ऐतिहासिक पल के गवाह वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर के सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा के विधायक चैतराम अटामी भी बने। इन सभी जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के बीच बैठकर रेडियो पर ‘मन की बात’ सुनी, जो सुदूर वनांचल में आ रहे सामाजिक बदलाव की स्पष्ट झलक पेश कर रही थी।

दहशत के शोर पर भारी पड़ी रेडियो की आवाज

कुछ महीनों पहले तक जिस छिंदनार में लोग बम धमाकों की आवाज और नक्सली दहशत के बीच जीने को मजबूर थे, वहां आज शांति से रेडियो की आवाज गूंज रही थी। कार्यक्रम सुनने के बाद ग्रामीणों ने साझा किया कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन देश को एक सूत्र में पिरोने का काम करता है। उन्होंने माना कि इसके जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक बदलावों और नवाचारों की जानकारी मिलती है, जिससे अन्य लोगों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। ग्रामीणों के अनुसार, यह कार्यक्रम नागरिकों की नई सोच और अनूठी कोशिशों को पहचान दिलाने के साथ ही जनभागीदारी की भावना को भी मजबूत करता है।

बस्तर में विकास की नई इबारत

छिंदनार में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए लोगों का उमड़ना केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे बस्तर में तेजी से आ रहे चहुंमुखी विकास का प्रतीक है। वर्तमान में क्षेत्र के नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने के साथ ही बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। सरकार बस्तर के उन दुर्गम गांवों तक पहुंच रही है, जहां नक्सलवाद के कारण दशकों से विकास ठप्प पड़ा था। सड़कों का जाल बिछाने, मोबाइल कनेक्टिविटी सुधारने, स्कूलों और अस्पतालों की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन पूरी सक्रियता और गंभीरता के साथ काम कर रहा है ताकि हर नागरिक को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।  

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