20 सितम्बर 2026 |
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धमतरी बना छत्तीसगढ़ का प्रमुख टूरिज्म हब

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OM Darpan

Aug 31, 2026 11:13 pm 932 views
धमतरी बना छत्तीसगढ़ का प्रमुख टूरिज्म हब
  • कयाकिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स ने बढ़ाया रोमांच, 98% तक भरे बांधों को देखने देश-प्रदेश से उमड़ रहे सैलानी

धमतरी।
छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर धमतरी जिले ने अपनी एक विशिष्ट और अमिट पहचान कायम कर ली है। मानसून के सुहावने मौसम और आगामी त्यौहारों के सीजन के बीच जिले के गंगरेल जलाशय, रुद्री डैम, माडमसिल्ली और नरहरा जैसे पर्यटन स्थलों पर सैलानियों का भारी तांता लगा हुआ है। शांत जलतरंगें, हरियाली से ढकी सुरम्य पहाड़ियां और कल-कल बहते झरनों का मनोहारी वातावरण पर्यटकों को सुकून के पल बिताने का न्योता दे रहा है। धमतरी अब महज एक पड़ाव न रहकर राज्य का एक प्रमुख टूरिज्म हब बनकर उभर चुका है, जहां प्रकृति का अनुपम सौंदर्य और रोमांचक जलक्रीड़ाएं सैलानियों को यादगार अनुभव दे रही हैं।
एडवेंचर और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम
 
जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। 'मिनी गोवा' के नाम से प्रसिद्ध गंगरेल जलाशय अपनी विशाल जलराशि, शानदार सूर्यास्त और वॉटर बोटिंग के कारण पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। वहीं, रुद्री डैम में शुरू की गई कयाकिंग और अन्य एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां युवाओं व साहसिक खेल प्रेमियों को खासा आकर्षित कर रही हैं। इसके अलावा एशिया के पहले 'सायफन डैम' के रूप में विख्यात माडमसिल्ली बांध की स्थापत्य कला, सिहावा का श्रृंगऋषि पर्वत, कर्णेश्वर महादेव, सप्तऋषि, नरहरा जलप्रपात, जबर्रा हिल्स और वनों से आच्छादित नगरी विकासखण्ड प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए एक आदर्श गंतव्य साबित हो रहे हैं।
जलाशयों में रिकॉर्ड जलस्तर ने बढ़ाई खूबसूरती
 
पर्यटन में आए इस अभूतपूर्व उछाल के पीछे इस वर्ष बांधों में भरपूर जलभराव मुख्य कारण है। महानदी जलाशय परियोजना के अंतर्गत रविशंकर सागर (गंगरेल) में 90.72% जलभराव है, जहां वर्तमान जलस्तर 347.95 मीटर (1141.62 फीट) दर्ज किया गया है और 3548 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है। इसी प्रकार मुरूमसिल्ली जलाशय 98.82% जलभराव (जलस्तर 376.22 मीटर) के साथ अपनी कुल क्षमता के बिल्कुल करीब है। दुधावा में 82.37% (423.88 मीटर) और सोंढूर जलाशय में 68.90% (468.52 मीटर) जलभराव दर्ज किया गया है। पर्याप्त जलराशि से न केवल सिंचाई और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हुई है, बल्कि आसपास का प्राकृतिक वातावरण भी बेहद मनोरम हो उठा है।
चाक-चौबंद व्यवस्थाओं से स्वरोजगार के खुले द्वार
पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की गई हैं। वाटर स्पोर्ट्स के दौरान लाइफ जैकेट पहनना और प्रशिक्षित गाइडों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। आधारभूत संरचनाओं का विकास करते हुए सुव्यवस्थित पार्किंग, सुंदर उद्यान, विश्राम स्थल, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पर्यटन के निरंतर विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, बोटिंग संचालन, खान-पान और हस्तशिल्प के क्षेत्र में स्वरोजगार व आजीविका के नए द्वार खुले हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया संबल मिल रहा है। प्रकृति, रोमांच और जन-सुविधाओं के अनूठे समन्वय के कारण सैलानी बार-बार यहां आने को आकर्षित हो रहे हैं।

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