नेतन्याहू का संयुक्त राष्ट्र भाषण, कई प्रतिनिधि हाल से निकले बाहर
OM Darpan
ईरान पर हमले को बताया आसान फैसलों में से एक, विरोध में बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को कहा ‘नैतिक रूप से कायर’
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संबोधन के दौरान गुरुवार को अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। उनके मंच पर पहुंचते ही कुछ लोगों ने खुशी जताई, जबकि कई प्रतिनिधियों ने हूटिंग की और बड़ी संख्या में लोग हाल से बाहर चले गए। बाद में महासभा की अधिकतर सीटें खाली नजर आईं।
संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने ईरान पर हमले का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनके अब तक के सबसे आसान फैसलों में से एक था। उन्होंने उनके भाषण के समय हाल से बाहर जाने वाले देशों के प्रतिनिधियों की कड़ी आलोचना की।
बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों पर साधा निशाना
महासभा में शोर और प्रतिनिधियों के बाहर जाने के बीच अध्यक्ष खलीलुर रहमान को बार-बार हाल में शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।
अपना संबोधन शुरू करते हुए नेतन्याहू ने कहा, “अगर कोई और भी नैतिक रूप से कायर है जो अभी तक हाल से बाहर नहीं गया है, तो कृपया अभी बाहर चला जाए।”
उन्होंने दावा किया कि अपनी रक्षा करते हुए इजरायल उन देशों की भी रक्षा कर रहा है, जिनके प्रतिनिधि महासभा के हाल से बाहर चले गए। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि उन देशों के कई नेता ईरान के परमाणु हथियारों को खत्म करने के लिए निजी तौर पर इजरायल का शुक्रिया अदा करते हैं।
फलस्तीनी मिशन ने की थी बाहर जाने की अपील
संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीनी मिशन ने 193 सदस्य देशों में से कई को संदेश भेजकर महासभा के हाल में अधिक से अधिक कर्मचारियों को लाने और इजरायली प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा होते ही सामूहिक रूप से बाहर निकलने की अपील की थी।
संदेश में कहा गया था कि ऐसा करके नेतन्याहू और उनकी सरकार को स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि कोई भी उनके कथित नरसंहार, युद्ध अपराधों और अवैध कब्जे में मदद या साथ देने को तैयार नहीं है।
संदेश में शांति पसंद करने वाले देशों और लोगों की ओर से इसे समाप्त करने की मांग भी की गई थी।
इजरायल ने आरोपों को किया खारिज
इजरायल नरसंहार और युद्ध अपराधों के आरोपों को खारिज करता है। वह फलस्तीनी इलाके पर अवैध कब्जे के आरोप को भी स्वीकार नहीं करता।
दी गई जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी इजरायली बस्तियों को अवैध माना जाता है, जबकि इजरायल सरकार का कहना है कि ये बस्तियां कानूनी हैं।
जरूरी खबरें
विज्ञापन