21 सितम्बर 2026 |
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छोटे सत्र पर बिफरीं मायावती, अफसरों की जवाबदेही और सदन की गंभीरता पर सवाल

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OM Darpan

Aug 03, 2026 08:30 pm 466 views
छोटे सत्र पर बिफरीं मायावती, अफसरों की जवाबदेही और सदन की गंभीरता पर सवाल
  लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। पेपर लीक और चढ़ावा चोरी जैसे छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष के कड़े रुख के कारण यह सत्र काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। सत्र के दौरान योगी सरकार अपने साढ़े नौ साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश करेगी। वहीं, विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने के लिए सवालों की एक विस्तृत सूची तैयार कर ली है।

मायावती के तल्ख तेवर

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सत्र की शुरुआत के साथ ही सरकार और विपक्ष दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महज चार दिन के सत्र को नाकाफी बताते हुए जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की संभावनाओं पर संदेह जताया है। मायावती ने अफसरशाही को संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए विधायिका के प्रभाव को मजबूत रखने की वकालत की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतना छोटा सत्र केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

संभल रिपोर्ट और सियासी दांव

योगी सरकार सदन में संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट पेश करेगी। तीन सदस्यीय आयोग की इस रिपोर्ट के जरिए सरकार सपा को सियासी कठघरे में खड़ा करने की योजना बना रही है। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संभल को सियासी प्रयोगशाला बनाने की जुगत में जुटी सरकार इस रिपोर्ट से बड़ा दांव चलेगी। इसके साथ ही पिछले सत्र के बाद आए 9 अध्यादेशों के स्थान पर नए विधेयक भी लाए जाएंगे।

बजट और विधायी कार्य

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश के वित्त मंत्री 4 अगस्त को सदन में अनुपूरक बजट पेश करेंगे। इसके बाद 6 अगस्त को बजट पर विस्तृत चर्चा होगी, जिसके बाद सरकार इसे सदन से पारित कराएगी। सत्र के दौरान विभिन्न विभागों के कैग प्रतिवेदन भी सदन के पटल पर रखे जाएंगे। 5 अगस्त को अन्य विधायी कार्यों को निपटाने के बाद सरकार अपने आगामी लक्ष्यों पर चर्चा को आगे बढ़ाएगी।

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