सौर ऊर्जा के उपयोग से अन्नदाता अब बनेंगे ऊर्जादाता
OM Darpan
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश का किसान अब केवल अन्नदाता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सौर ऊर्जा को अपनाकर वह वास्तविक अर्थों में ऊर्जादाता भी बनेगा। भारत मंडपम में बुधवार को आयोजित तीन दिवसीय सातवें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि खेती और सौर ऊर्जा का यह मॉडल विश्व कल्याण और किसानों की आर्थिक समृद्धि का नया मार्ग प्रशस्त करेगा।
छोटे किसानों के अनुकूल बने नीति
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में 85 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनकी औसत भूमि जोत मात्र 0.96 हेक्टेयर है। ऐसे में एग्रीवोल्टाइक नीति इस तरह बननी चाहिए जो इन किसानों के खेतों पर व्यावहारिक रूप से सफल हो। इस तकनीक से एक ही जमीन पर ऊपर सोलर पैनल से बिजली पैदा होगी और नीचे फसल लहलहाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पैनल की ऊंचाई और खंभों के बीच की दूरी ऐसी होनी चाहिए जिससे किसान अपनी पसंद की फसल उगा सके और जुताई में बाधा न आए। इसके साथ ही पैनलों से गिरने वाले बारिश के पानी के सुरक्षित निकास का पुख्ता प्रबंध होना चाहिए ताकि खेतों में मिट्टी का कटाव न हो।
कृषि क्षेत्र की विकास दर 4.5 प्रतिशत
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारतीय कृषि क्षेत्र लगातार 4.5 प्रतिशत की मजबूत विकास दर बनाए हुए है और कृषि उत्पादों का निर्यात 52.55 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। देश के अन्न भंडार पूरी तरह भरे हुए हैं। रबी सीजन 2026-27 की बुवाई भी शुरू हो गई है, जिसमें दलहन और तिलहन पर खास फोकस है। उन्होंने सुझाव दिया कि सोलर उपकरणों के संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण स्थानीय ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को दिया जाए। यदि कोई कंपनी बीच में परियोजना छोड़ती है, तो उसका वित्तीय बोझ किसानों पर न पड़े, इसकी जिम्मेदारी शुरुआत में ही तय होनी चाहिए।
2050 तक की बिजली मांग हो सकती है पूरी
सम्मेलन में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने टेरी के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि देश की 11.6 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि में से लगभग 30 प्रतिशत एग्रीवोल्टाइक तकनीक के लिए उपयुक्त है। यदि इस उपयुक्त भूमि के मात्र 10 प्रतिशत हिस्से पर भी यह तकनीक लगा दी जाए, तो भारत 2050 तक की अपनी पूरी अनुमानित बिजली मांग को पूरा कर सकता है। इससे फसलों की पैदावार में भी 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
कुसुम योजना से 30 लाख पंप सौर ऊर्जा से जुड़े
केंद्रीय मंत्री जोशी ने बताया कि देश की गैर-जीवाश्म बिजली स्थापित क्षमता 308 गीगावाट पार कर चुकी है और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण इसकी लागत घटकर मात्र 2.60 रुपये प्रति यूनिट रह गई है। पीएम कुसुम योजना के तहत अब तक 30 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है। सरकार जल्द ही इस योजना का अगला चरण शुरू करेगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 3.32 लाख पूर्णकालिक रोजगार पैदा होंगे और युवाओं का पलायन रुकेगा।
उद्घाटन समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाईक, जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर विक, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी, कृषि सचिव अतीश चंद्रा और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान किसानों के लिए एग्रीवोल्टाइक से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी टूल्स का विमोचन भी किया गया।
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