गजवा-ए-हिंद नहीं, भगवा-ए-हिंद होगा: पं. धीरेंद्र शास्त्री
OM Darpan
Nov 06, 2025 03:28 am
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06 Nov 2025
उत्तरकाशी।
बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने कवि कुमार विश्वास के साथ बुधवार को उत्तरकाशी के बड़कोट में यमुना नदी के किनारे पूजा-अर्चना की। इस दौरान, उन्होंने नदी की शुद्धता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक बड़ी घोषणा की। शास्त्री ने 7 नवंबर से 16 नवंबर तक दिल्ली से वृंदावन के बीच 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा' का ऐलान किया, जिसका मुख्य उद्देश्य सनातनियों को एकजुट करना है।
मां यमुना की शुद्धता पर गंभीर चिंता
यमुना तट पर पूजा-अर्चना करने के बाद आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने नदी के स्वरूप पर हैरानी और दुख दोनों व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी में मां यमुना का पानी 'सोने जैसा एकदम शुद्ध' है। उन्होंने आगे कहा, 'मां यमुना का यह रूप देखकर, मुझे हैरानी हुई कि ऐसी पवित्रता ब्रज क्षेत्र और दिल्ली में क्यों नहीं मिलती। यह देखकर मेरा दिल बैठ गया।' उन्होंने यमुना को उसके मूल शुद्ध रूप में वापस लाने के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। नदी की शुद्धता पर चिंता जताना, इस पदयात्रा के ऐलान का एक बड़ा कारण बना है।दिल्ली से वृंदावन, 10 दिन की पदयात्रा
आध्यात्मिक गुरु आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू एकता के उद्देश्य से इस बड़ी 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा' की घोषणा की है। यह यात्रा 7 नवंबर को शुरू होगी और 16 नवंबर तक चलेगी। इस 10 दिवसीय यात्रा का मार्ग दिल्ली से वृंदावन होगा। पदयात्रा का प्राथमिक उद्देश्य हिंदुओं को एक साथ लाना और सनातनियों को मजबूती से एकजुट करना है।
धार्मिक और राजनीतिक रूप से तीखे बयान
पदयात्रा की घोषणा करते समय धीरेंद्र शास्त्री ने कई तीखे और आधिकारिक बयान भी दिए। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि इस देश में कोई 'तनातनी' नहीं होगा, सिर्फ 'सनातनी' होंगे। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, 'इस देश में कोई 'गजवा-ए-हिंद' नहीं होगा, सिर्फ 'भगवा-ए-हिंद' होगा।' उन्होंने राम के विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि राम का साथ देने वालों की जयकार होगी, राम का विरोध करने वालों की नहीं। यह पदयात्रा धार्मिक आंदोलन के साथ-साथ हिंदू एकता के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने का भी काम करेगी।
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