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स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नीट को लेकर उठाए गंभीर मुद्दे, पूर्व की स्थिति पर की टिप्पणी

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OM Darpan

Aug 03, 2024 01:20 am 194 views
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नीट को लेकर उठाए गंभीर मुद्दे, पूर्व की स्थिति पर की टिप्पणी
  नीट की परीक्षा व्यवस्था में सुधार और बढ़ती सामाजिक समावेशन की दिशा में उठाए गए कदम   नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने शुक्रवार को राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पर चर्चा के दौरान नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) की परीक्षा व्यवस्था में हुए सुधार और पूर्व की समस्याओं पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।   नीट की परीक्षा प्रणाली में सुधार जेपी नड्डा ने कहा कि कुछ लोगों का यह मानना है कि नीट के माध्यम से राज्यों के अधिकारों का हनन हुआ है और यह कि मेडिकल शिक्षा में कुछ विशेष वर्ग के लोग ही प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने पूर्व की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि मेडिकल शिक्षा एक व्यवसायिक क्षेत्र बन चुकी थी। "जब मैं स्वास्थ्य मंत्री था और नीट लागू कर रहा था, तब चर्चा होती थी कि पोस्ट ग्रेजुएशन की एक सीट 8-8 करोड़ रुपये में बिकती थी। रेडियोलॉजी जैसे विभागों की सीटें 12 से 13 करोड़ रुपये तक बिकती थीं। यह एक खुला व्यापार बन चुका था," उन्होंने कहा।   भ्रष्टाचार और अनियमितताएं नड्डा ने बताया कि पहले अभिभावक और छात्र विभिन्न शहरों में परीक्षाओं के लिए जाते थे, जिससे पैसा और समय बर्बाद होता था। इसके साथ ही, एडमिशन लिस्ट को जल्दी-जल्दी बदलने की शिकायतें भी थीं। यह स्थिति लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी।   नीट के विस्तार और सामाजिक समावेशन स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि नीट की परीक्षा अब 154 शहरों से बढ़कर 571 शहरों में आयोजित की जा रही है, जिसमें 270 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सेंटर्स की संख्या भी 2,546 से बढ़कर 4,750 हो गई है। इसके अलावा, 2019 से 2024 के बीच सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों की सफलता में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।   भाषाई विविधता का समावेश जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश के अनुसार नीट परीक्षा को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की बात की। अब नीट की परीक्षा 13 भारतीय भाषाओं में आयोजित की जाती है, जिससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी मेडिकल शिक्षा में प्रवेश मिल रहा है। यह पहले केवल प्रिविलेज क्लास के छात्रों के लिए था, लेकिन अब यह विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के छात्रों के लिए भी सुलभ हो गया है।
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