ILBS में EWS इलाज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली सरकार को नोटिस जारी, 4 नवंबर को सुनवाई
OM Darpan
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वसंत कुंज स्थित यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान (ILBS) में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मरीजों को मुफ्त इलाज न मिलने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने बुधवार को इस संबंध में दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मामले की सुनवाई जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने की। अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अवधेश कुमार साह के बेटे राहुल राज की याचिका पर संज्ञान लेते हुए इसे स्वीकार कर लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।
याचिकाकर्ता का आरोप: अनियमितता के कारण गवाई मां की जान
वकील विवेक शर्मा के माध्यम से दायर इस याचिका में राहुल राज ने दावा किया है कि ILBS अस्पताल में जारी 'व्यवस्थित अनियमितताओं' के कारण उन्होंने अपनी बीमार मां को खो दिया। याचिका में अस्पताल में मरीजों के अधिकारों के कथित उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।
2018 के फैसले के पालन का अनुरोध
याचिका में शीर्ष अदालत से मांग की गई है कि ILBS को सुप्रीम कोर्ट के 9 जुलाई 2018 के बाध्यकारी फैसले का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया जाए।
बता दें कि 2018 के फैसले के अनुसार, रियायती दरों पर सरकारी जमीन हासिल करने वाले सभी निजी व स्वायत्त अस्पतालों के लिए EWS श्रेणी के मरीजों को 10 प्रतिशत IPD (अंतरंग रोगी विभाग) और 25 प्रतिशत OPD (बहिरंग रोगी विभाग) में मुफ्त इलाज देना अनिवार्य है।
जरूरी खबरें
विज्ञापन