12 अक्टूबर 2026 |
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दुनिया पर धौंस जमाने के लिए नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए ताकतवर बनना चाहता है भारत

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OM Darpan

Oct 12, 2026 06:32 pm 170 views
दुनिया पर धौंस जमाने के लिए नहीं बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए ताकतवर बनना चाहता है भारत


एनडीसी के 66वें कोर्स के अधिकारियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने दिया कड़ा संदेश, 'वसुधैव कुटुंबकम' को बताया भारत की पहचान


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नई दिल्ली।

भारत का लक्ष्य दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनना जरूर है, लेकिन इसका मकसद किसी अन्य राष्ट्र पर अपना प्रभुत्व जमाना या अपनी शर्तें मनवाना बिल्कुल नहीं है। भारत इसलिए ताकतवर बनना चाहता है ताकि भविष्य में कोई भी दूसरा देश उस पर अपनी अनैतिक शर्तें न थोप सके। यह बेबाक टिप्पणी उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) में सैन्य और सिविल अधिकारियों को संबोधित करते हुए की।


'भारत के मूल मूल्य, राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय उद्देश्य' विषय पर अपने विचार रखते हुए उपराष्ट्रपति ने देश की सुरक्षा, कूटनीति और वैश्विक नजरिए के कई अहम पहलुओं पर बात की। इस कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों, सिविल सेवा और पुलिस के साथ-साथ मित्र देशों के 41 विदेशी अधिकारियों सहित कुल 122 प्रतिभागी मौजूद थे। उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से हर देश की संप्रभुता और आत्मसम्मान का हिमायती रहा है और किसी भी देश को दूसरों की सीमाओं का अतिक्रमण करने से बचना चाहिए।


'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन पर टिका है हमारा आधार


उपराष्ट्रपति ने दुनिया के साथ भारत के रिश्तों की चर्चा करते हुए 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरा विश्व एक परिवार है) के दर्शन को देश की राष्ट्रीय पहचान की नींव बताया। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान 'वैक्सीन मैत्री' पहल, प्राकृतिक आपदाओं के समय भारत द्वारा दी गई त्वरित मदद और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर वैश्विक नेतृत्व का उदाहरण देते हुए इसे भारतीय मूल्यों का जीता-जागता प्रमाण बताया।


साल 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसके लिए उपलब्ध संसाधनों का सही इस्तेमाल और लंबी सोच वाली नीतियों की जरूरत है। राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साइबर स्पेस, समुद्री हित और आर्थिक समृद्धि भी शामिल है।


उन्होंने आतंकवाद, साइबर क्राइम, महामारी और अंतरराष्ट्रीय अपराध जैसे मौजूदा दौर के खतरों से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग बढ़ाने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) के साथ मजबूत रिश्ते बनाने पर जोर देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार इन देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसे सामूहिक प्रयासों से ही खत्म किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान एनडीसी के कमांडेंट एयर मार्शल मनीष कुमार गुप्ता समेत कई गणमान्य लोग और संकाय सदस्य उपस्थित थे।

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