लातूर बैंक के डायरेक्टर पद से हटाए गए मंत्री बाबासाहेब पाटिल, 10 साल की सीमा पार करने पर आरबीआई की कार्रवाई
OM Darpan
बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश और सतीश जाधव की शिकायत पर रिजर्व बैंक ने जारी किया हटाने का आदेश
✍️ विशेष संवाददाता
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल और लातूर जिला केंद्रीय सहकारी (डीसीसी) बैंक के सात अन्य डायरेक्टरों को उनके पदों से हटाने का आदेश दिया है। इन सभी पर यह कार्रवाई बैंक डायरेक्टर के रूप में 10 साल के कार्यकाल की निर्धारित सीमा पार करने के कारण की गई है। पाटिल उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से जुड़े हुए हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई
केंद्रीय बैंक का यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद आया है। अदालत ने बैंक सदस्य सतीश शेषराव जाधव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए थे। आरबीआई के असिस्टेंट जनरल मैनेजर कपिल गोस्वामी ने शुक्रवार को इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया।
इस मामले में राज्य सहकारिता विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी सुधीर अमृते ने पुणे के सहकारिता आयुक्त को पत्र लिखकर उन जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के डायरेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था, जिन्होंने पद पर 10 साल से अधिक समय पूरा कर लिया है। इसके बाद 25 मई 2026 को सतीश जाधव ने आरबीआई के चीफ जनरल मैनेजर को शिकायत सौंपी थी और लातूर डीसीसी बैंक के आठ डायरेक्टरों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी।
सतीश जाधव ने शनिवार को बताया कि इस शिकायत की प्रतियां लातूर डिवीजन के डिवीजनल जॉइंट रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां), सहकारिता आयुक्त और आरबीआई के नाबार्ड सेक्शन को भी सौंपी गई थीं।
पाटिल ने नियम के समय पर उठाए सवाल
आरबीआई के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबासाहेब पाटिल ने कहा कि वह इस आदेश को चुनौती नहीं देंगे। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि 10 साल का यह नियम वर्ष 2021 में लागू हुआ था। उन्होंने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या इसे 2021 से पहले की गई नियुक्तियों पर लागू किया जा सकता है।
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