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कम पानी में बंपर मुनाफे की तैयारी, धान छोड़ फूलों की खेती करेंगे वीरेंद्र साहू

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OM Darpan

Jul 07, 2026 08:09 am 356 views
कम पानी में बंपर मुनाफे की तैयारी, धान छोड़ फूलों की खेती करेंगे वीरेंद्र साहू
 

राजनांदगांव ।

कभी धान की लहलहाती फसल के लिए पहचाने जाने वाले खेत अब रंग-बिरंगे गेंदा फूलों से महकने की तैयारी में हैं। यह बदलाव किसी मजबूरी का नहीं, बल्कि बदलते मौसम, घटते जल संसाधनों और बेहतर आय की तलाश में एक प्रगतिशील किसान की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। राजनांदगांव जिले के ग्राम जंगलेश्वर के किसान वीरेंद्र कुमार साहू ने इस खरीफ सीजन में अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में धान के स्थान पर गेंदा फूल की खेती शुरू करने का निर्णय लेकर फसल विविधीकरण की दिशा में नई मिसाल पेश की है।

पारंपरिक खेती से मोहभंग

करीब 20 एकड़ कृषि भूमि के मालिक वीरेंद्र साहू के मुताबिक पिछले वर्ष अल्प वर्षा और बेमौसम बारिश ने धान की फसल को भारी चोट पहुंचाई थी। उत्पादन घटने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद उन्होंने खेती के पारंपरिक ढर्रे से आगे बढ़कर ऐसी फसल अपनाने का फैसला किया, जो कम पानी में अच्छी पैदावार दे और बाजार में बेहतर कीमत भी दिला सके।

कृषि विभाग का मार्गदर्शन

इस नई शुरुआत में कृषि विभाग का मार्गदर्शन वीरेंद्र के लिए संबल बना। विभाग की सलाह पर उन्होंने मृदा परीक्षण कराया और गेंदा फूल की वैज्ञानिक खेती की तकनीक अपनाई। ग्राम मोहड़ में पिछले वर्ष किसानों को गेंदा फूल की खेती से मिली सफलता ने भी उन्हें नई राह चुनने का आत्मविश्वास दिया। गेंदा फूल की सबसे बड़ी ताकत इसकी निरंतर बाजार मांग है। धार्मिक आयोजनों, विवाह समारोहों, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसकी आवश्यकता पूरे वर्ष बनी रहती है।

बाजार में भारी मांग

राजनांदगांव के निकटवर्ती दुर्ग जिले का बड़ा बाजार फूलों की खपत के लिए तैयार है। वीरेंद्र साहू को विश्वास है कि कम पानी, अपेक्षाकृत कम लागत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह खेती उनकी आय में उल्लेखनीय इजाफा करेगी। वे मानते हैं कि आज के दौर में खेती को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप ढालना समय की सबसे बड़ी दरकार है। उनका कहना है कि यदि किसान धान के साथ-साथ कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाएं, तो जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।

सरकारी प्रोत्साहन का लाभ

वीरेंद्र साहू राज्य सरकार द्वारा फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को दी जा रही 15 हजार रुपये की आदान सहायता को भी इस बदलाव का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को मिल रहा यह प्रोत्साहन नई सोच के साथ खेती करने का विश्वास दे रहा है। इससे अधिक से अधिक किसान परंपरागत खेती के साथ वैकल्पिक फसलों की ओर भी कदम बढ़ाएंगे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
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