21 सितम्बर 2026 |
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

वंदे मातरम के 150 वर्ष: प्रधानमंत्री ने किया वर्षभर चलने वाले स्मरणोत्सव का शुभारंभ

शेयर करें

OM Darpan

Nov 08, 2025 12:07 am 220 views
वंदे मातरम के 150 वर्ष: प्रधानमंत्री ने किया वर्षभर चलने वाले स्मरणोत्सव का शुभारंभ

  • प्रधानमंत्री बोले – वंदे मातरम का सार है भारत, मां भारती जो देश का शाश्वत विचार है

नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक मंत्र, एक ऊर्जा, एक स्वप्न और एक पवित्र संकल्प है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गीत मां भारती के प्रति भक्ति और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है, जो हमें हमारे इतिहास से जोड़ता है और भविष्य के लिए प्रेरणा देता है।


इतिहास और प्रेरणा का प्रतीक

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम का सार भारत है — मां भारती, जो देश का शाश्वत विचार है।
उन्होंने बताया कि यह विचार मानव सभ्यता की शुरुआत से ही आकार लेता रहा है और भारत की संस्कृति को विशिष्ट पहचान देता है।
उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में वंदे मातरम स्वतंत्रता का उद्घोष बन गया — एक ऐसा मंत्र जो हर क्रांतिकारी के होठों पर गूंजता था।


स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा

मोदी ने कहा कि वंदे मातरम स्वतंत्रता आंदोलन का गीत ही नहीं, बल्कि शाश्वत प्रेरणा का स्रोत है।
यह हमें याद दिलाता है कि हमने आज़ादी कैसे हासिल की और यह भी सिखाता है कि उसकी रक्षा कैसे करनी है।
उन्होंने कहा कि जब भी तिरंगा फहराया जाता है, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” की आवाज़ हर भारतीय के हृदय से निकलती है।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी

इस अवसर पर वंदे मातरम को समर्पित एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पावन अवसर देशवासियों को नई प्रेरणा और ऊर्जा देगा।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों और विभूतियों को नमन किया और प्रत्येक नागरिक को शुभकामनाएं दीं।


वंदे मातरम: गीत से मंत्र तक

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने “आनंदमठ” में वंदे मातरम लिखा, तब यह केवल गीत नहीं था बल्कि एक स्वतंत्र भारत का सपना था।
उन्होंने बताया कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में इसे गाया, और बंगाल विभाजन (1905) के विरोध में यही गीत सामूहिक प्रतिरोध का प्रतीक बना।
यह गीत हर काल में प्रासंगिक रहा और भारतीय आत्मा की पहचान बन गया।

सुजलाम सुफलाम भारत का स्वप्न

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम की पहली पंक्ति “सुजलाम सुफलाम मलयज शीतलाम” भारत की प्रकृति और समृद्धि की प्रतीक है।
बंकिम बाबू ने उस युग में भी एक समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न देखा था जब देश गरीबी और दासता में जकड़ा था।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम झूठे औपनिवेशिक प्रचार को ध्वस्त करने वाला गीत था।


शहीदों की प्रेरणा और आज का भारत

प्रधानमंत्री ने कहा कि कई क्रांतिकारियों ने फांसी के तख्ते पर “वंदे मातरम” गाया।
यह गीत हर युग में संघर्ष और साहस की आवाज़ बना रहा।
आज जब भारत आत्मनिर्भरता और विज्ञान-तकनीक में नई ऊंचाइयां छू रहा है, तो प्रत्येक उपलब्धि वंदे मातरम के उद्घोष से गूंजती है।
उन्होंने कहा कि जब भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा या जब हमारी बेटियां लड़ाकू विमान उड़ाती हैं — हर भारतीय का दिल “वंदे मातरम” से भर उठता है।

राष्ट्र रक्षा और नई पीढ़ी का संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे सुरक्षा बल जब आतंकवाद और नक्सलवाद पर विजय पाते हैं, तो उनका उद्घोष भी “वंदे मातरम” ही होता है।
उन्होंने चेताया कि विभाजनकारी मानसिकता आज भी राष्ट्र के लिए चुनौती है और युवाओं को इतिहास से सीखना चाहिए।
उन्होंने आह्वान किया कि वंदे मातरम का मंत्र अमृत काल में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देगा।


प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के 280 करोड़ हाथ मिलकर किसी भी लक्ष्य को पूरा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम हमें आत्मविश्वास देता है कि कोई भी संकल्प असंभव नहीं है।
अंत में प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों को वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी।


कार्यक्रम में उपस्थिति

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

Tags

शेयर करें

विज्ञापन / Advertisement

Government Advertisement
260921161008661

विज्ञापन

Advertisement