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छत्तीसगढ़ ने खोया 'हास्य का सितारा': पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को मुख्यमंत्री साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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OM Darpan

Jul 10, 2025 09:15 am 429 views
छत्तीसगढ़ ने खोया 'हास्य का सितारा': पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को मुख्यमंत्री साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

  • मुख्यमंत्री ने कहा- उनकी क्षति पूरे राज्य और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय

रायपुर। हास्य-व्यंग्य की दुनिया के जगमगाते सितारे, पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को आज नम आँखों से विदाई दी गई। राजधानी रायपुर के जोरा स्थित श्री सालासर बालाजी धाम के सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वर्गीय डॉ. दुबे के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें व शोकाकुल परिजनों को इस दुःख की घड़ी में धैर्य व शक्ति प्रदान करें।

'छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत'

मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हास्य-व्यंग्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत थे। उन्होंने गहरे भावुकता के साथ कहा, "सभी को हँसाने वाला यह महान कवि आज हमें रुलाकर चला गया।" मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. दुबे ने अपनी विलक्षण काव्य प्रतिभा के माध्यम से न केवल देशभर में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उन्होंने डॉ. दुबे के आकस्मिक निधन को पूरे राज्य और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया, जिसकी भरपाई असंभव है।

मंचों पर मिलता था विशेष सम्मान

मुख्यमंत्री साय ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने अनेक कवि सम्मेलनों में भाग लिया है, और शायद ही कोई प्रमुख आयोजन ऐसा रहा हो जहाँ डॉ. दुबे की उपस्थिति न रही हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर मंच पर उन्हें देश के प्रतिष्ठित कवियों द्वारा विशेष सम्मान प्राप्त होता था।

जिंदादिल व ऊर्जावान व्यक्तित्व के धनी थे डॉ. दुबे: उपमुख्यमंत्री अरुण साव

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी श्रद्धांजलि सभा में स्व. डॉ. सुरेंद्र दुबे को नमन करते हुए कहा कि वे केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक जिंदादिल और ऊर्जावान व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को सम्मान दिलाया। साव ने कहा कि डॉ. दुबे ने प्रदेश के कोने-कोने में घूम-घूमकर लोगों को न केवल हँसाया, बल्कि सामाजिक चेतना भी जगाई। इस अवसर पर डॉ. सुरेंद्र दुबे के परिजन एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे, जिन्होंने इस महान कवि को अपनी अंतिम श्रद्धांजलि दी।
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