18 सितम्बर 2026 |
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'तुंहर टोकन' ऐप से घर बैठे बिका 71 क्विंटल धान, किसानों को मिल रहा 3100 रुपये का भाव

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OM Darpan

Dec 20, 2025 12:25 am 362 views
'तुंहर टोकन' ऐप से घर बैठे बिका 71 क्विंटल धान, किसानों को मिल रहा 3100 रुपये का भाव


 रायपुर/सरगुजा।

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की प्रक्रिया अब पुरानी जटिलताओं से निकलकर डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है। प्रदेश में लागू पारदर्शी और सुव्यवस्थित व्यवस्था से अन्नदाताओं को बड़ी राहत मिली है। इसका एक जीता-जागता उदाहरण सरगुजा जिले में देखने को मिला, जहाँ तकनीक और प्रशासन की मुस्तैदी ने किसान की राह आसान कर दी है।

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घर बैठे टोकन, केंद्र पर तुरंत काम

अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बकालो के रहने वाले किसान चंद्रप्रकाश कुशवाहा के लिए इस साल की धान खरीदी का अनुभव बेहद खास रहा। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मौसम की मेहरबानी से फसल बंपर हुई है। सबसे बड़ी राहत 'तुंहर टोकन' ऐप ने दी। चंद्रप्रकाश ने मंडी के चक्कर लगाने के बजाय घर बैठे ही मोबाइल ऐप के जरिए अपने 71.20 क्विंटल धान बेचने के लिए टोकन कटाया।

गेट पास से लेकर बारदाने तक, सब कुछ पारदर्शी

निर्धारित तारीख पर जब चंद्रप्रकाश दरिमा धान उपार्जन केंद्र पहुंचे, तो उन्हें लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। गेट पास तुरंत जारी हुआ और नमी परीक्षण के फौरन बाद उन्हें बारदाना उपलब्ध करा दिया गया। चंद्रप्रकाश बताते हैं, "पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से समय पर पूरी हुई। मुझे किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।"

किसानों के लिए छांव और पानी का इंतजाम

उपार्जन केंद्रों पर सिर्फ धान खरीदी ही नहीं, बल्कि किसानों की सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। किसान चंद्रप्रकाश ने बताया कि केंद्र पर पीने का साफ पानी, बैठने की व्यवस्था और छांव जैसी मूलभूत सुविधाएं मौजूद हैं। इससे अपनी बारी का इंतजार करना अब कष्टदायक नहीं रहा।

3100 रुपये के भाव से आर्थिक स्थिति हुई मजबूत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य ने किसानों की आर्थिक रीढ़ मजबूत की है। चंद्रप्रकाश कुशवाहा ने मुख्यमंत्री और राज्य शासन का आभार जताते हुए कहा कि धान बेचने से मिली राशि का उपयोग अब वे गेहूं, सरसों और सब्जी उत्पादन में कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। प्रशासन द्वारा प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही इन सुविधाओं से कृषक वर्ग में संतोष और उत्साह का माहौल है।

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