छत्तीसगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त: 13 माह में 171 हादसे, 40 से ज्यादा मौतें
OM Darpan
Sep 27, 2025 11:05 pm
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27 Sep 2025
- रायपुर के सिलतरा फैक्ट्री हादसे में 6 श्रमिकों की मौत, कई घायल
- उद्योगों में सुरक्षा मानकों की निगरानी करने वाले विभागों पर निष्क्रियता के आरोप।
निगरानी विभागों पर गंभीर सवाल
गोदावरी पावर एवं इस्पात फैक्ट्री (हीरा ग्रुप) में हुए हादसे ने उन विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, जिनकी जिम्मेदारी उद्योगों में लगातार निगरानी, निरीक्षण और खामियों को उजागर कर कार्रवाई करने की होती है। चौंकाने वाली बात यह है कि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन में इन जिम्मेदार विभागों ने पिछले कई वर्षों से एक भी बड़ी कार्रवाई नहीं की है।लगातार हादसों का सिलसिला
प्रदेश में औद्योगिक हादसों का यह कोई पहला मामला नहीं है। अप्रैल 2025 में जांजगीर-चांपा स्थित प्रकाश इंडस्ट्रीज में हुए हादसे में 13 मजदूर घायल हो गए थे। वहीं, सरगुजा स्थित मां कुदरगढ़ी एलुमिना में सितंबर 2024 को हुए हादसे में चार मजदूरों की मौत हो गई थी।बेमेतरा बारूद फैक्ट्री हादसा भूले नहीं
इससे पहले 25 मई 2024 को बेमेतरा के पिरदा गांव स्थित बारूद फैक्ट्री में हुए दर्दनाक हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा इतना भयावह था कि शवों के टुकड़ों की पहचान डीएनए टेस्ट से करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन को लंबे समय तक जनाक्रोश का सामना करना पड़ा था।हीरा ग्रुप का विस्तार
गोदावरी पावर एंड इस्पात, हीरा ग्रुप की एक इकाई है। हीरा ग्रुप की अन्य इकाइयां भी प्रदेश में कार्यरत हैं, जिनमें सोलर पावर और स्पंज आयरन शामिल हैं। पिछले 25 वर्षों के भीतर हीरा ग्रुप ने प्रदेश में कई कंपनियों का विस्तार किया है, जिसमें विदेशों में भी निवेश शामिल है।कांग्रेस ने बनाई जांच कमेटी
गोदावरी इस्पात संयंत्र में हुए हादसे की जांच के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी का अध्यक्ष पूर्व मंत्री धनेन्द्र साहू को बनाया गया है। इसमें पूर्व सांसद छाया वर्मा, पूर्व विधायक अनिता शर्मा, पीसीसी महामंत्री दीपक मिश्रा, बिरगांव के महापौर नंदलाल देवांगन और ग्रामीण अध्यक्ष उधोराम वर्मा को सदस्य शामिल हैं।घटना के हर पहलू की हो जांच: महंत
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मेरी संवेदनाएं मृतकों के परिवारों के साथ हैं। ईश्वर उन्हें यह असहनीय पीड़ा सहने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने शासन-प्रशासन से घटना के हर पहलू की जांच करने और मृतक परिवारों को जल्द से जल्द आर्थिक मदद पहुंचाने की मांग की।50 लाख मुआवजे की मांग
प्रदेश कांग्रेस असंगठित क्षेत्र समस्या निवारण प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मोहम्मद सिद्दीक़ ने मांग की है कि मृतकों के परिजनों को कम से कम 50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों को अनदेखा करती है, तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।मुख्यमंत्री ने जताया शोक, दिए निर्देश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिलतरा फैक्ट्री हादसे में 6 श्रमिकों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक बताते हुए जिला प्रशासन को घायलों के इलाज की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं शोक संतप्त परिजनों को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की। हादसे की जानकारी मिलते ही श्रम एवं औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों को बचाव कार्य के निर्देश दिए गए।जिम्मेदार विभाग और उनकी भूमिका:
श्रम विभाग: फैक्ट्री अधिनियम (श्रम कानूनों का पालन करवाने के लिए) के तहत मानकों का पालन सुनिश्चित करना। कारखाना एवं बायलर: फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की निगरानी करना। पर्यावरण संरक्षण मंडल: उद्योगों की चिमनियों की निगरानी, हवा, पानी, शोर की जांच करना। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा: खतरनाक रसायन, गैस, विस्फोट आदि की जांच, फैक्ट्रियों की अधोसंरचना आदि का निरीक्षण। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण: उद्योगों में हादसों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना। इन सभी विभागों की स्पष्ट जिम्मेदारियों के बावजूद, प्रदेश में लगातार हो रहे औद्योगिक हादसे एक बड़े सिस्टमैटिक फेलियर की ओर इशारा कर रहे हैं।
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