23 सितम्बर 2026 |
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चमत्कार: ब्रश करते समय फटी गर्दन की नस

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OM Darpan

Jan 06, 2026 08:40 am 1,512 views
चमत्कार: ब्रश करते समय फटी गर्दन की नस
  • दुनिया में ऐसे सिर्फ 10 केस

  •  मेकाहारा के डॉक्टरों ने दी मरीज को नई जिंदगी

 

रायपुर |

पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने चिकित्सा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यहां के डॉक्टरों ने एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा स्थिति—'स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर' (Spontaneous Carotid Artery Rupture - SCAR) का सफल ऑपरेशन कर एक 40 वर्षीय मरीज की जान बचाई है।

चिकित्सकों के अनुसार, यह छत्तीसगढ़ राज्य का अपनी तरह का पहला मामला है। वहीं, विश्व मेडिकल जर्नल में अब तक ऐसे केवल 10 प्रकरण ही दर्ज हैं, जो इस सर्जरी को अत्यंत दुर्लभ बनाते हैं।

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सुबह ब्रश करते वक्त अचानक आई आफत

घटनाक्रम के मुताबिक, रायपुर निवासी 40 वर्षीय मरीज सुबह घर पर दांत साफ (ब्रश) कर रहा था। तभी अचानक उसके गले में तेज दर्द उठा और देखते ही देखते पूरी गर्दन में सूजन आ गई। स्थिति इतनी बिगड़ी कि कुछ ही क्षणों में मरीज बेहोश हो गया। परिजन उसे तत्काल अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर पहुंचे।

जांच में दिखा नसों का गुब्बारा (स्यूडोएन्युरिज्म)

गर्दन की नसों की सीटी एंजियोग्राफी (CT Angiography) जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मरीज की दायीं 'कैरोटिड आर्टरी' (हृदय से मस्तिष्क तक खून ले जाने वाली मुख्य नस) फट चुकी थी और उसके चारों ओर खून का एक गुब्बारानुमा घेरा बन गया था। मेडिकल भाषा में इसे 'कैरोटिड आर्टरी स्यूडोएन्युरिज्म' कहा जाता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तुरंत हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में डॉ. कृष्ण कांत साहू के पास रेफर किया गया।

जोखिम भरी सर्जरी: 'बोवाइन पेरिकार्डियम पैच' से जुड़ी नस

डॉ. कृष्ण कांत साहू ने बताया कि यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था, जिसमें सफलता की दर 50 से 60 प्रतिशत ही मानी जाती है। गर्दन में खून के भारी जमाव के कारण असली धमनी को पहचानना मुश्किल था। ऑपरेशन के दौरान जरा सी चूक से मरीज की जान जा सकती थी या मस्तिष्क में खून का थक्का (Clot) पहुंचने से उसे लकवा मार सकता था।

मरीज और परिजनों की सहमति के बाद कई घंटों तक चले इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। डॉक्टरों ने 'बोवाइन पेरिकार्डियम पैच' (Bovine Pericardium Patch) की मदद से फटी हुई धमनी की अत्यंत सावधानीपूर्वक मरम्मत की। राहत की बात यह रही कि सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मरीज को किसी प्रकार का लकवा नहीं हुआ। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है।

स्वस्थ व्यक्ति में नस फटना अत्यंत दुर्लभ

आमतौर पर कैरोटिड आर्टरी फटने की घटनाएं एथेरोस्क्लेरोसिस, ट्रॉमा, संक्रमण या ट्यूमर वाले मरीजों में होती हैं। लेकिन यह मरीज पूरी तरह स्वस्थ था। बिना किसी बीमारी के 'स्पॉन्टेनियस' (स्वतः) नस का फटना चिकित्सा विज्ञान में विरले ही देखा जाता है।

इस अभूतपूर्व सफलता पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर और हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की पूरी टीम को बधाई दी है। उन्होंने इसे संस्थान के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

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