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बीरगांव के शासकीय स्कूल में आया शिक्षकों का अकाल, “ बच्चों का भविष्य लगा दांव पर ”

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OM Darpan

Jul 18, 2025 08:50 am 448 views
बीरगांव के शासकीय स्कूल में आया शिक्षकों का अकाल, “ बच्चों का भविष्य लगा दांव पर ”

बीरगांव (सत्यानंद सोई)। छत्तीसगढ़ के बीरगांव नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 10 स्थित बंजारी नगर रावाभाठा में पीएम श्री शासकीय नवीन प्राथमिक शाला में शिक्षकों की घोर कमी के कारण 250 से अधिक छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। जहां स्कूल में 8 सहायक शिक्षकों और 1 प्रधान पाठक की आवश्यकता है, वहीं मात्र 2 सहायक शिक्षक पूरे स्कूल की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस गंभीर स्थिति ने बच्चों की पढ़ाई और उनके अभिभावकों की चिंता को बढ़ा दिया है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।    

एक शिक्षक के कंधों पर पांच कक्षाओं का बोझ

स्कूल की वर्तमान स्थिति बेहद चिंताजनक है। उपलब्ध दो सहायक शिक्षकों में से एक अक्सर प्रशिक्षण और अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त रहता है, जबकि दूसरा अकेला ही पांच कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाने के लिए मजबूर है। यह न केवल बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी को भी उजागर करता है। पालकों का कहना है कि इस तरह से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना असंभव है।  

शिकायतें अनसुनी, कार्रवाई नदारद

इस गंभीर समस्या को लेकर कांग्रेस पार्षद कविता सुदन सिक्ली ने कई बार आवाज उठाई है। उन्होंने बताया कि 30 जून 2025 को उन्होंने कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और नगर पालिक निगम बीरगांव को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद, 14 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय व ग्रामीण क्षेत्र के विधायक मोतीलाल साहू को भी इस संबंध में लिखित शिकायत भेजी गई, परंतु अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह दर्शाता है कि प्रशासनिक स्तर पर समस्या को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।  

बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर संकट

बोर्ड परीक्षाओं का समय जैसे-जैसे करीब आ रहा है, छात्रों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। कई छात्रों ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई शुरू ही नहीं हो पाई है। ऐसे में वे अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी कैसे करेंगे, यह एक बड़ा प्रश्न बन गया है। इस स्थिति से छात्रों का मनोबल गिर रहा है व उनके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।  

"शासन क्यों नहीं संवार रहा बच्चों का भविष्य ?"

स्कूल की इस दयनीय स्थिति को देखकर छात्रों के पालक भी गहरे सदमे में हैं। वे सवाल उठा रहे हैं कि यदि शासन शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर पा रहा है, तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा? यह सवाल बीरगांव की शिक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर चिंता का बादल बन चुका है। पालकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि उनके बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।  

शिक्षा विभाग का अगला कदम क्या होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर संकट का समाधान कब करेगा। क्या राज्य सरकार इस मुद्दे को तुरंत सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी, या फिर यह स्थिति ऐसे ही बनी रहेगी? यह देखने वाली बात होगी कि कब तक बीरगांव के इन मासूम बच्चों को बेहतर शिक्षा का अधिकार मिल पाएगा।
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