धमतरी की आदिवासी महिलाओं ने अजोला से बदली अपनी तकदीर
OM Darpan
Jul 28, 2026 12:01 am
705 views
28 Jul 2026
धमतरी। तालाबों और जलाशयों के शांत पानी पर तैरने वाली जलीय घास अजोला अब धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के लिए वरदान साबित हो रही है। ग्राम पंचायत अमाली की आदिवासी बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने जिसे लोग साधारण घास समझते थे, उसे अपनी आजीविका और आर्थिक स्वावलंबन का मुख्य आधार बना दिया है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण और सामूहिक प्रयास से इन महिलाओं ने प्राकृतिक खेती का एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो आज पूरे राज्य के लिए मिसाल बन चुका है।
अनीता बाई ने बदला नजरिया
अमाली पंचायत की कृषि सखी और 'बिहान' समूह की सक्रिय सदस्य श्रीमती अनिता बाई मरकाम ने बताया कि पहले उन्हें अजोला के फायदों की जानकारी नहीं थी। पशुपालन विभाग के प्रशिक्षण से जुड़ने के बाद उन्हें अजोला का बीज (कल्चर) मिला। उन्होंने वैज्ञानिक विधि अपनाते हुए घर के छोटे टैंकों में इसका उत्पादन शुरू किया। अब तक वे 25 किलोग्राम से अधिक अजोला उगा चुकी हैं और अब इसे बड़े पैमाने पर विस्तार देने की तैयारी में हैं।खेती और पशुपालन में बड़ा बदलाव
अजोला का उपयोग धान की फसल में जैविक पूरक के रूप में किया जा रहा है। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा प्राकृतिक रूप से बढ़ती है और नमी बरकरार रहती है। रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होने से किसानों की लागत भी घट रही है। यह केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि दुधारू पशुओं, मत्स्य पालन और मुर्गियों के लिए सुपरफूड साबित हो रहा है। इससे दूध की गुणवत्ता और पशुओं के वजन में भी इजाफा दर्ज किया गया है।चेतन और तुषार का मिला साथ
इस अभियान में स्थानीय सहयोगी चेतन कुमार नेताम और तुषार यादव का निरंतर सहयोग मिल रहा है, जिससे बिहान समूह की दीदियों में प्राकृतिक खेती को लेकर नया आत्मविश्वास जागा है। श्रीमती अनिता बाई मरकाम के अनुसार, भविष्य में यह समूह वर्मी कम्पोस्ट और अन्य मूल्यवर्धित जैविक उत्पाद तैयार करने की योजना बना रहा है। अमाली की इन महिलाओं ने साबित कर दिया कि स्थानीय संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का कायाकल्प संभव है।जरूरी खबरें
विज्ञापन