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रायपुर में 450 साल पुरानी सिख विरासत के दर्शन, पहली बार दुर्लभ धरोहरें प्रदर्शित

OM Darpan

Jul 31, 2025 10:38 am 431 views
रायपुर में 450 साल पुरानी सिख विरासत के दर्शन, पहली बार दुर्लभ धरोहरें प्रदर्शित
  रायपुर। छत्तीसगढ़वासियों के लिए सिख इतिहास के स्वर्णिम पन्नों को करीब से देखने का एक दुर्लभ अवसर सामने आया है। सिख गुरुओं की 450 वर्ष पुरानी पवित्र और ऐतिहासिक सामग्रियां पहली बार राजधानी रायपुर में प्रदर्शित की जा रही हैं, जो आस्था और इतिहास का एक अद्भुत संगम है। प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. भगवान सिंह खोजी पंजाब से इन अमूल्य धरोहरों को लेकर रायपुर पहुंचे हैं। ये सभी वस्तुएं गुरुद्वारा बाबा बुड्ढा जी साहब, तेलीबांधा रायपुर में 31 जुलाई की शाम को दर्शन के लिए उपलब्ध होंगी। यह आयोजन सिख धर्म की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का जीता-जागता प्रमाण है।  

सैकड़ों साल पुरानी गुरुओं की धरोहर

प्रदर्शनी में कई ऐसी वस्तुएं शामिल हैं, जो सिख धर्म के अनुयायियों और इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखती हैं। इनमें श्री गुरु हरगोबिंद सिंह की कृपाण, ढाल और कमंडल विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा, महाराजा रणजीत सिंह के समय के नानकशाही सिक्के भी दर्शन के लिए उपलब्ध होंगे। प्रदर्शनी का एक और प्रमुख आकर्षण श्री गुरु हरगोबिंद साहिब की दुर्लभ तस्वीर और श्री गुरु गोविंद सिंह द्वारा पांच प्यारों को दिया गया हुक्मनामा साहिब है। साथ ही, गुरु गोविंद सिंह द्वारा स्वर्ण स्याही में लिखी गई ग्रंथ पुस्तक और श्री गुरु अंगद देव के 35 अक्षर – जो गुरुमुखी लिपि के मूल स्वरूप को दर्शाते हैं – भी यहां देखे जा सकेंगे। माता दामोदर जी का पीढ़ा और एक रथ का युद्ध घंटा भी इस दुर्लभ संग्रह का हिस्सा हैं।

पीढ़ियों के लिए प्रेरणा

छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज ने समस्त सिख संगत और सभी श्रद्धालुजनों से इस ऐतिहासिक और पवित्र आयोजन में उपस्थित होकर गुरुओं की इस अमूल्य विरासत के दर्शन करने की भावुक अपील की है। छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, मनमोहन सिंह सैलानी, परविंदर सिंह भाटिया, सुरजीत सिंह छाबड़ा, स्वर्ण पाल सिंह चावला, परमजीत सिंह सलूजा, मनजीत सिंह भाटिया, हरविंदर सिंह खालसा, मनदीप सिंह सलूजा, गुरदीप सिंह टुटेजा, मानवेंद्र सिंह दियाला, हरदीप सिंह छाबड़ा, बेमेतरा के जिला अध्यक्ष गुरमीत सिंह अरोड़ा और बिलासपुर के जिला अध्यक्ष गुरमीत सिंह अरोड़ा ने संयुक्त रूप से यह अपील की है। उनका कहना है कि यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा और हमें अपने इतिहास, धर्म और परंपरा से जुड़ने का अमूल्य अवसर प्रदान करेगा। धार्मिक आस्था, इतिहास और आत्मिक ऊर्जा से भरपूर यह प्रदर्शनी हर श्रद्धालु के लिए अवश्यदर्शनीय है।
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