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नक्सलियों ने उठाई शांति वार्ता की मांग, सुरक्षा बलों की वापसी व ऑपरेशन रोकने की रखी शर्तें

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OM Darpan

Apr 02, 2025 09:51 pm 363 views
नक्सलियों ने उठाई शांति वार्ता की मांग, सुरक्षा बलों की वापसी व ऑपरेशन रोकने की रखी शर्तें


रायपुर।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले नक्सलियों ने बड़ा प्रस्ताव सामने रखा है। सुरक्षाबलों की आक्रामक कार्रवाईयों के बीच माओवादियों ने सरकार से शांति वार्ता की पेशकश करते हुए ऑपरेशन रोकने का आग्रह किया है। इस प्रस्ताव में नक्सलियों ने कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह चिट्ठी सीपीआई (माओवादी) के अधिकृत संगठन ने भेजी है या किसी अन्य संगठन ने। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा है कि संभव है यह प्रस्ताव नक्सलियों के किसी फ्रंटल संगठन ने भेजा हो।

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राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा का बयान

राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने अखबार ‘छत्तीसगढ़’ से चर्चा में कहा कि सरकार इस चिट्ठी की जांच करवा रही है। उन्होंने कहा कि चिट्ठी में उठाए गए कई मुद्दों पर गौर करना होगा क्योंकि इसकी भाषा सरकार पर युद्ध जैसे आरोप लगा रही है, जो वर्तमान की जमीनी सच्चाई नहीं है। विजय शर्मा ने कहा कि सरकार गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है लेकिन इसके लिए उचित मंच बनाना होगा।


नक्सलियों का प्रेस नोट व मांगें

यह प्रेस नोट सीपीआई (माओवादी) केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय द्वारा जारी किया गया है। इसमें माओवादियों ने शांति वार्ता की इच्छा जताई है और केंद्र सरकार से 'ऑपरेशन कागर' रोकने की अपील की है। उनका दावा है कि इस ऑपरेशन के नाम पर आदिवासी समुदायों पर हिंसा की जा रही है।


माओवादियों की प्रमुख बातें

  1. युद्ध विराम व शांति वार्ता की अपील
    माओवादियों ने भारत सरकार और सीपीआई (माओवादी) दोनों से बिना शर्त युद्ध विराम की मांग की है और मध्य भारत में युद्ध तत्काल रोकने का आह्वान किया है।

  2. 'कागर' ऑपरेशन पर सवाल
    भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों के सहयोग से चलाए जा रहे ‘कागर’ ऑपरेशन को माओवादियों ने आदिवासी क्षेत्रों के खिलाफ बताया। इस अभियान से हिंसा, हत्याएं व सामूहिक गिरफ्तारियों का आरोप लगाया गया है।

  3. मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप
    माओवादियों का कहना है कि इस अभियान में 400 से अधिक माओवादी नेता, कार्यकर्ता और आदिवासी नागरिक मारे गए हैं। महिला माओवादियों पर सामूहिक यौन हिंसा और फांसी का भी आरोप लगाया गया है। कई नागरिकों को अवैध हिरासत व यातना देने का आरोप भी सामने आया है।

  4. शांति वार्ता के लिए शर्तें

    • प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की वापसी।

    • नई सैन्य तैनाती का अंत।

    • आतंकवाद विरोधी अभियानों का निलंबन।

  5. सरकार पर आरोप
    सरकार पर आदिवासी समुदायों के खिलाफ नरसंहार जैसे युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया गया है। माओवादियों का कहना है कि नागरिक क्षेत्रों में सेना का उपयोग असंवैधानिक है।

  6. जनता से अपील
    माओवादियों ने बुद्धिजीवियों, मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों, छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं से सरकार पर शांति वार्ता के लिए दबाव बनाने और राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने का आग्रह किया है।

  7. वार्ता के लिए तत्परता
    माओवादियों ने कहा कि यदि सरकार उनकी शर्तें मानती है तो वे बातचीत के लिए तैयार हैं और सरकार के सैन्य अभियान बंद करने के बाद युद्ध विराम की घोषणा करेंगे।

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