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बॉलीवुड की चकाचौंध नहीं, संस्कारों में है असली सफलता: आर्य समाज ने नवरात्रि पर किया नारी शक्ति का महा-सम्मान!

Arya Samaj Sthapana Diwas Bhilai

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भिलाई (रोहितास सिंह भुवाल)।

नवरात्रि के पावन पर्व और आर्य समाज के स्थापना दिवस के अवसर पर सेक्टर-6 स्थित आर्य समाज द्वारा एक भव्य महिला सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। नारी सम्मान और वैदिक संस्कृति को समर्पित इस कार्यक्रम में समाज की प्रतिष्ठित महिलाओं, शिक्षिकाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली मातृशक्ति को सम्मानित किया गया। विशेष रूप से महर्षि दयानंद आर्य विद्यालय की शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम का संचालन आचार्य प्रेम प्रकाश शास्त्री और अंकित शास्त्री के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक और वैदिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।

‘जहां नारी का सम्मान, वहीं देवताओं का वास’

कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए आचार्य डॉ. अजय आर्य ने कहा कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती मध्यकाल के ऐसे महान विचारक थे, जिन्होंने महिलाओं की शिक्षा और उनकी गरिमा को समाज में पुनः स्थापित करने का साहसिक कार्य किया। उन्होंने ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’ श्लोक का उल्लेख करते हुए बताया कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। डॉ. आर्य ने कहा कि शिक्षित महिला ही परिवार और समाज को संस्कारित कर आने वाली पीढ़ियों का निर्माण करती है, इसीलिए महर्षि दयानंद ने महिलाओं की शिक्षा को पुरुषों से अधिक आवश्यक माना था।

पश्चिमी चकाचौंध और बॉलीवुड को लेकर दी नसीहत

आचार्य डॉ. अजय आर्य ने महिलाओं के लिए आयुर्वेद के ज्ञान को जरूरी बताते हुए कहा कि इससे वे अपने परिवार को स्वस्थ रख सकती हैं। उन्होंने समाज से पश्चिमी संस्कृति और बॉलीवुड की चकाचौंध के प्रभाव से बाहर निकलकर वैदिक मूल्यों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी चकाचौंध को ही सफलता मान बैठी है, जबकि वास्तविक सफलता संस्कार, ज्ञान और चरित्र निर्माण में है। यह भी याद दिलाया गया कि आर्य समाज की स्थापना के 151 वर्ष और महर्षि दयानंद के अवतरण के 202 वर्ष पूरे हो चुके हैं, जिससे उनके विचार आज और भी प्रासंगिक हो गए हैं।

इस अवसर पर आर्य समाज के वरिष्ठ सदस्यों और गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। महिलाओं में मुख्य रूप से रेणु गिरधर, सरोज बहल, सुषमा सोनी, सुदर्शन मल्होत्रा, दया ग्रोवर, फूलमती गुप्ता, अर्चना खंडेलवाल, ज्योति पुरम, कमलेश आर्य, मधु गुप्ता, संध्या श्रीवास्तव, रीता भल्ला, श्वेता शर्मा, वीणा गुप्ता, शीला डोनेडे, नीता चौरसिया, रीता रानी शर्मा, डॉ. अनुपमा मौर्य, नीरू भल्ला, सुषमा मौर्य, दीप्ति, सरिता, सीमा, विराजिका, मोहिनी गौतम, निधि चड्ढा, डॉ. नीलम मल्होत्रा, सोनिया पुरंग, सुधा वासने, हरिप्रिया, अंजू ठाकुर, शकुंतला द्विवेदी, सुमन साहू, शशि शर्मा, रश्मि देहरी और सुचिता उपस्थित थीं।

वहीं, भिलाई, दुर्ग और रायपुर से आए प्रवीण गुप्ता, रामनिवास गुप्ता, समीर चड्ढा और विक्रम आर्य सहित कई आर्य जन भी कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुए। अंत में आर्य समाज सेक्टर-6 के प्रधान अवनी भूषण पुरंग ने सभी अतिथियों और सहभागियों का आभार व्यक्त किया।

आर्य समाज: 1875 से जारी है सामाजिक सुधार का यज्ञ

गौरतलब है कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने 10 अप्रैल 1875 को मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों और भेदभाव को समाप्त कर वैदिक सिद्धांतों पर आधारित सशक्त व शिक्षित समाज का निर्माण करना है। वेदों का प्रचार, नारी शिक्षा, सामाजिक समानता और स्वदेशी की भावना को बढ़ावा देना आज भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

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