खाकी की भूमिका पर गहराया संदेह!
जगदलपुर।
बस्तर की अधिष्ठात्री देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर में बीती रात चोरों ने बड़ी दुस्साहसिक वारदात को अंजाम देकर समूचे संभाग को हिला दिया है। गणतंत्र दिवस के ठीक पहले, शहर के सबसे सुरक्षित और व्यस्ततम हृदय स्थल पर स्थित इस मंदिर के मुख्य द्वार (चैनल गेट) का ताला तोड़कर चोर भीतर घुसे और माता के कीमती आभूषण पार कर दिए।
घटना की संवेदनशीलता इस बात से बढ़ जाती है कि 23 तारीख को बसंत पंचमी के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा था, जिसके चलते चढ़ावा भी बड़ी मात्रा में था। इसी का फायदा उठाकर चोरों ने रात के अंधेरे में धावा बोला। सुबह जब पुजारी और मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य पहुंचे, तब टूटे हुए फाटक को देख उनके होश उड़ गए। तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी गई।
संदेह के घेरे में कोतवाली पुलिस
इस पूरी घटना ने पुलिसिया सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि मंदिर की सुरक्षा में तैनात दोनों होमगार्ड जवान एक साथ छुट्टी पर चले गए थे। सवाल यह उठ रहा है कि थाना प्रभारी ने संवेदनशील स्थल पर तैनात दोनों जवानों को एक साथ छुट्टी कैसे दे दी? और उनकी जगह दूसरे जवानों की तैनाती क्यों नहीं की गई? यह लापरवाही ‘चोर-पुलिस मौसेरे भाई’ वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है। इससे पूर्व संजय बाजार में हुई चोरियों के दौरान भी कोतवाली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे थे।
सीसीटीवी में कैद संदिग्ध, जांच जारी
सूचना मिलते ही बोधघाट थाना प्रभारी टीआई लीलाधर राठौड़ और कोतवाली थाना प्रभारी भोलासिंह राजपूत दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए हैं, जिसमें एक दिव्यांग व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, वारदात के तरीके को देखते हुए पुलिस का अनुमान है कि चोरों की संख्या एक से अधिक रही होगी। चोर माई दंतेश्वरी के गले का हार और परिसर में स्थित अन्य देवियों के आभूषण भी समेट ले गए हैं।
फिलहाल मंदिर समिति चोरी हुई सामग्री और नगदी का मिलान कर रही है। बस्तरवासियों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। लोगों ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि लापरवाह पुलिसकर्मियों और थाना प्रभारी की भूमिका की भी सूक्ष्मता से जांच की जाए।









