नई दिल्ली (ओमदर्पण न्यूज़)।
लगातार दबाव झेल रही भारतीय मुद्रा ‘रुपये’ के लिए आज का दिन काफी राहत भरा रहा। बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 61 पैसे की बड़ी मजबूती के साथ 94.57 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। बाजार के जानकारों द्वारा इसे रुपये के लिए एक बहुत बड़ी रिकवरी माना जा रहा है।
रुपये की मजबूती के 3 मुख्य कारण:
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कच्चे तेल में भारी गिरावट: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौते के संकेत देने के बाद वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (कच्चा तेल) 8 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया और 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। भारत के लिए कच्चा तेल सस्ता होने का सीधा अर्थ है कम डॉलर का बाहर जाना, जिससे रुपये को स्वाभाविक मजबूती मिलती है।
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ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट: डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत में “बड़ी प्रगति” हुई है। उन्होंने जहाजों को सुरक्षा देने वाला ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ भी रोक दिया है। इस शांति वार्ता की खबर से दुनियाभर की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ, जिसका सीधा फायदा भारतीय मुद्रा को मिला।
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RBI की ‘अप्रत्यक्ष’ रणनीति: बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को सहारा देने के लिए अब नई तकनीक अपना रहा है। सीधे तौर पर विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करने के बजाय, सरकार बैंकों को ‘विदेशी मुद्रा बॉन्ड’ के जरिए डॉलर जुटाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है ताकि बाजार में डॉलर की पर्याप्त सप्लाई बनी रहे।
आज के कारोबार का उतार-चढ़ाव:
बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.00 के स्तर पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 95.18 के निचले स्तर तक भी गया, लेकिन अंत में 61 पैसे की जोरदार छलांग लगाकर 94.57 पर बंद हुआ। गौरतलब है कि मंगलवार को रुपया 95.18 के स्तर पर बंद हुआ था।
शेयर बाजार में भी लौटी रौनक
रुपये के मजबूत होने के साथ-साथ आज घरेलू शेयर बाजार में भी भारी उत्साह देखा गया। सेंसेक्स में 940 अंकों की जोरदार तेजी दर्ज की गई। वहीं, दुनिया की प्रमुख 6 मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती दिखाने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ भी 0.66 प्रतिशत गिरकर 97.79 पर आ गया, जिसने भारतीय मुद्रा की राह और भी आसान कर दी।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
रुपये के मजबूत होने से अर्थव्यवस्था और आम आदमी दोनों को फायदा होता है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत बढ़ने से विदेशों से आयात होने वाली चीजें (जैसे मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान और कच्चा तेल) सस्ती होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही, यह बाजार में विदेशी निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाता है।









