14 सितम्बर 2026 |
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कभी नक्सल खौफ से कांपता था सुकमा का यह गांव, अब घर बैठे मिल रहीं सरकारी सुविधाएं; 'सुशासन तिहार' ने बदली तस्वीर

OM Darpan

May 12, 2026 10:39 am 197 views
कभी नक्सल खौफ से कांपता था सुकमा का यह गांव, अब घर बैठे मिल रहीं सरकारी सुविधाएं; 'सुशासन तिहार' ने बदली तस्वीर

 

सुकमा (ओमदर्पण न्यूज़)।

घने जंगलों और कभी नक्सल प्रभाव के कारण प्रशासनिक पहुंच से दूर रहे सुकमा जिले के उसकेवाया गांव में अब बदलाव की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। जिन ग्रामीणों को कभी छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, आज उन्हें वही सुविधाएं उनके गांव में ही मिल रही हैं। शासन की पहल 'सुशासन तिहार 2026' ने इस दूरस्थ गांव के लोगों के चेहरे पर नई मुस्कान लौटा दी है।

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सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के पहुंचविहीन ग्राम उसकेवाया में आयोजित सुशासन शिविर ग्रामीणों के लिए राहत और भरोसे का बड़ा केंद्र बन गया है। जब प्रशासन की टीम गांव पहुंची तो लोगों ने बड़ी संख्या में शिविर में हिस्सा लिया। शिविर में जाति, निवास और जन्म प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज मौके पर ही बनाकर हितग्राहियों को सौंपे गए।

चेहरे पर लौटी मुस्कान, मुख्यमंत्री का जताया आभार

कक्षा 10वीं की छात्रा मड़कम पायके के चेहरे की खुशी इस बदलाव की असली तस्वीर है। निवास प्रमाण पत्र हाथ में लेते हुए उसने कहा कि अब आगे की पढ़ाई और शैक्षणिक प्रक्रियाओं में उसे कोई परेशानी नहीं होगी। उसने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्थानीय प्रशासन का आभार जताया। वहीं, गांव की मड़कम भारती, पूजा और दीपक ने भी जाति प्रमाण पत्र मिलने पर खुशी जाहिर की।

 

इस शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दो महिला हितग्राहियों की 'गोद भराई' की रस्म भी संपन्न कराई गई।

इन समस्याओं का भी हो रहा तुरंत समाधान

सुशासन तिहार 2026 के तहत सुकमा जिले में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, राशन कार्ड, जॉब कार्ड, पेंशन, मनरेगा भुगतान, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और शौचालय निर्माण जैसे लंबित मामलों का भी तेजी से निराकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही बिजली, ट्रांसफार्मर सुधार और हैंडपंप मरम्मत से जुड़ी समस्याओं पर भी तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

जिला प्रशासन का प्रयास है कि जिले के हर अंतिम गांव तक योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचे। पंचायतों में हितग्राहियों की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित कर पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है। कभी सरकारी योजनाओं से दूर रहे उसकेवाया जैसे गांवों में अब लोगों को यह भरोसा होने लगा है कि शासन की सुविधाएं सचमुच उनके दरवाजे तक पहुंच रही हैं। सुशासन तिहार ने यहां सिर्फ समस्याओं का समाधान नहीं किया है, बल्कि लोगों के भीतर व्यवस्था के प्रति विश्वास भी मजबूत किया है।

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