तीन नक्सलियों का आत्मसमर्पण: छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन नीति का असर
OM Darpan
Sep 26, 2024 10:03 pm
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26 Sep 2024
सुकमा (कौशल संदुजा)।
जिले में सक्रिय तीन नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ शासन की "छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन एवं पुनर्वास नीति" और "नियद नेल्ला नार" योजना से प्रेरित होकर किया गया। इसके अलावा, अंदरूनी क्षेत्रों में लगातार स्थापित हो रहे सुरक्षा कैंपों और पुलिस के बढ़ते प्रभाव ने भी इन नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में मुचाकी संतोष (कन्हाईगुड़ा आरपीसी डीएकेएमएस उपाध्यक्ष), रवा नंदा (सुरपनगुड़ा आरपीसी डीएकेएमएस सदस्य), और दिरदो भीमा उर्फ महेश (पालाचलमा आरपीसी मिलिशिया सदस्य) शामिल हैं। इन सभी ने बिना हथियार के आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया।
नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करने में सुरक्षा बलों की विशेष भूमिका
217 और 208 कोबरा वाहिनी, 201 कोबरा वाहिनी, और सुकमा जिले के सुरक्षा बलों ने नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए विशेष रूप से प्रेरित किया। आत्मसमर्पण प्रक्रिया में इन वाहिनियों की आसूचना शाखा के कर्मियों का अहम योगदान रहा।
नक्सली मुचाकी संतोष, उम्र 30 वर्ष, निवासी ग्राम कन्हाईगुड़ा, थाना कोंटा, जिला सुकमा ने 217 वाहिनी सीआरपीएफ के द्वितीय कमान अधिकारी विरेन्द्र कुमार और डीआरजी जिला सुकमा के प्रभारी निरीक्षक अभिलाष टण्डन के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इसी प्रकार, रवा नंदा, उम्र 32 वर्ष, निवासी ग्राम चिमलीपेंटा, थाना चिंतलनार ने डीआरजी जिला सुकमा के प्रभारी निरीक्षक अभिलाष टण्डन और सायबर सेल सुकमा के प्रभारी निरीक्षक मुकेश यादव के समक्ष आत्मसमर्पण किया। तीसरे नक्सली दिरदो भीमा, उम्र 25 वर्ष, निवासी इत्तनपाड़, थाना किस्टाराम ने 208 कोबरा वाहिनी के निरीक्षक अनिल कुमार के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पित नक्सलियों का विवरण
इन नक्सलियों ने पुलिस गश्त पार्टी की रेकी करने, पुलिस पार्टी के रास्तों पर स्पाइक और बम लगाने, मुख्य मार्गों को खोदकर अवरुद्ध करने, और शासन के खिलाफ बैनर और पर्चे लगाने जैसी नक्सली गतिविधियों में हिस्सा लिया था। इन सभी को छत्तीसगढ़ नक्सलवाद उन्मूलन और पुनर्वास नीति के तहत सहायता राशि और सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
नक्सलियों की अमानवीय विचारधारा और शोषण से मिली मुक्ति
नक्सलियों ने संगठन की अमानवीय विचारधारा, शोषण, अत्याचार और बाहरी नक्सलियों द्वारा किए जा रहे भेदभाव से तंग आकर आत्मसमर्पण किया है। स्थानीय आदिवासियों पर हो रहे हिंसा और शोषण के कारण इन नक्सलियों ने संगठन छोड़ने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया।
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