22 सितम्बर 2026 |
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सरगुजा में जमीन के पट्टे के बदले बीट गार्ड ने पहाड़ी कोरवा से ली बकरा, मुर्गा, दारू और हजारों की रिश्वत

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OM Darpan

Sep 25, 2024 08:49 am 165 views
मैनपाट (पंकज शुक्ला) सरगुजा जिले के मैनपाट के असकला गांव में पहाड़ी कोरवा जनजाति के परिवार पिछले कई दशकों से वन भूमि पर रह रहे हैं और खेती करके अपना गुजारा कर रहे हैं। इन परिवारों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत वन भूमि का पट्टा पाने के लिए आवेदन जमा किया था। लेकिन, वन विभाग के बीट गार्ड रामकृपाल सिंह ने इनसे पट्टा दिलाने के नाम पर रिश्वत के रूप में बकरा, मुर्गा, दारू और हजारों रुपये वसूले। सुखन कोरवा, मायाराम, रामनाथ, दयाराम, नहर साय, नानसाय, मना राम, लांजा राम और रति राम ने बताया कि उन्होंने बीट गार्ड को 10 से ज्यादा बकरा, 20 से अधिक मुर्गियां, और तीन-तीन हजार रुपये दिए। इसके बावजूद उन्हें जमीन का पट्टा नहीं मिला। उनका दावा है कि पटवारी ने उन्हें बताया था कि वह जंगल की जमीन पर कब्जे का दस्तावेज तैयार करवा देगा, जिससे उन्हें आसानी से वन अधिकार अधिनियम के तहत जमीन का पट्टा मिल जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

रिश्वत का खुलासा और वन रक्षक का तबादला:

कोरवा परिवारों ने जब देखा कि उन्हें पट्टा नहीं मिला और बीट गार्ड रामकृपाल का तबादला हो गया, तब इस मामले का खुलासा हुआ। वन विभाग के प्रभारी रेंजर भारद्वाज ने इस बारे में जानकारी होने से इनकार किया, जबकि बीट गार्ड रामकृपाल से संपर्क नहीं हो सका। यह भी सामने आया है कि जंगल की जमीन पर अन्य लोग भी कब्जा कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे न केवल जंगल को खतरा हो रहा है, बल्कि कोरवा परिवारों को भी डर है कि उन्हें इस जमीन से बेदखल कर दिया जाएगा।

सुखन कोरवा ने कहा, "हमने बकरा, मुर्गा और रुपये देकर सोचा था कि हमें जमीन का पट्टा मिल जाएगा, लेकिन हमें सिर्फ धोखा मिला। अब हमें अपनी खेती और मकान का भविष्य अनिश्चित लग रहा है।"

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