17 सितम्बर 2026 |
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1860 में दशहरे के दिन स्व. लाल बहादुर माहेश्वरी प्रशाद सिंहदेव के निधन से घोषित हुआ शोक दिवस, दूसरे दिन होता है रावण दहन

OM Darpan

Oct 14, 2024 12:40 am 231 views
लखनपुर दशहरे के दूसरे दिन रावण दहन लखनपुर दशहरे के दूसरे दिन रावण दहन   अंबिकापुर (पंकज शुक्ला)। सरगुजा संभाग के लखनपुर शहर में पिछले 80 सालों से दशहरा के दूसरे दिन रावण दहन की परंपरा निभाई जा रही है। इसके पीछे कई किवदंतियां हैं, लेकिन इस परंपरा का असली कारण 1860 में दशहरे के दिन राजपरिवार के लाल बहादुर माहेश्वरी प्रशाद सिंहदेव का निधन है। इस घटना के बाद, उस दिन को शोक दिवस घोषित किया गया और अगले दिन दशहरा मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज तक जारी है। लखनपुर ही ऐसा क्षेत्र है जहां दशहरे के दिन रावण दहन नहीं होता, बल्कि अगले दिन यह आयोजन किया जाता है। रविवार को भी लखनपुर में दशहरे के दूसरे दिन रावण का दहन किया गया, जिसमें शहर और आसपास के लगभग 40 गांवों के ग्रामीण साक्षरता मिनी स्टेडियम में इकट्ठा हुए थे। इस अनूठी परंपरा के बारे में अग्रवाल सभा के प्रवक्ता और पीजी कॉलेज के विधायक प्रतिनिधि, मनोज अग्रवाल ने चर्चा के दौरान बताया कि दशहरे के दूसरे दिन रावण दहन की मुख्य वजह स्व. लाल बहादुर माहेश्वरी प्रशाद सिंहदेव का निधन है। उन्होंने बताया कि 1860 में दशहरे के दिन उनका निधन हुआ था, जिसके कारण उस दिन को शोक दिवस घोषित किया गया था। महाराज लखन सिंह के शासनकाल से यह परंपरा चल रही है, जो आज भी कायम है। इस जानकारी को अग्रवाल सभा के मीडिया प्रभारी एवं पीजी कॉलेज के विधायक प्रतिनिधि मनोज अग्रवाल ने दी ।
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