15 सितम्बर 2026 |
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

पटवारी ने मांगी रिश्वत, भू-स्वामी ने कलेक्टर से मांगी मदद

OM Darpan

Nov 08, 2024 01:00 am 158 views
[smartslider3 slider=6]

  • सरगुजा में नक्शा दुरुस्त करने के लिए 10 हजार की मांग

  • जनदर्शन में हुआ खुलासा

पटवारी रिश्वत सरगुजा पटवारी रिश्वत सरगुजा   अम्बिकापुर (पंकज शुक्ला)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में हलका पटवारी द्वारा जमीन का नक्शा दुरुस्त करने के लिए 10 हजार रुपए रिश्वत मांगे जाने का मामला सामने आया है। मोमिनपुरा निवासी मुस्तकिम ने परेशान होकर कलेक्टर जनदर्शन में अपनी शिकायत दर्ज करवाई। मुस्तकिम ने अपनी आर्थिक असमर्थता जाहिर करते हुए पटवारी को रिश्वत देने के लिए कलेक्टर से 8500 रुपए उधार मांगा है। इस आवेदन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया है और मामले की जांच शुरू हो गई है।
सड़क निर्माण का फैसला: जानकारी के अनुसार, मुस्तकिम ने 28 जून 2024 को अंबिकापुर की जमीन खसरा क्रमांक 4658/1, 4658, 4658/, 4654/1 पर भू-स्वामियों की आपसी सहमति से 15 फीट चौड़ी सड़क बनाने का निर्णय लिया था। इस सड़क निर्माण के लिए नक्शा दुरुस्त कराने का आवेदन एसडीएम अंबिकापुर के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। एसडीएम न्यायालय द्वारा 15 जुलाई को इस पर ज्ञापन जारी किया गया।
पटवारी की रिश्वत मांगने की घटना: मुस्तकिम ने बताया कि नक्शा दुरुस्त कराने के लिए हलका पटवारी श्रवण पांडेय को पहले ही 2500 रुपए की रिश्वत दी जा चुकी है। अब पटवारी द्वारा 8500 रुपए और मांगे जा रहे हैं। मुस्तकिम का कहना है कि वह गरीब हैं और इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थ हैं। इस कारण से उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत किया और कलेक्टर से 8500 रुपए उधार मांगा, जिसे वह एक महीने के भीतर लौटाने का वादा कर रहे हैं।
लोक सेवा गारंटी का उल्लंघन: मुस्तकिम ने अपने आवेदन में बताया कि हलका क्रमांक 15 के पटवारी श्रवण पांडेय ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत तय एक महीने की समय सीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं किया। उन्होंने मांग की है कि पटवारी पर 2500 रुपए का अर्थदंड अधिरोपित किया जाए और रिश्वत के रूप में दिए गए 2500 रुपए वापस कराए जाएं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया: अंबिकापुर के एसडीएम फागेश सिन्हा ने कहा कि जनदर्शन में शिकायत प्राप्त हुई है और नक्शा दुरुस्त करने के लिए पटवारी द्वारा कुछ राशि मांगे जाने की बात सामने आई है। इस शिकायत की जांच की जा रही है और जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक हलचल:  इस मामले से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। प्रशासन के उच्च अधिकारी इस पर नजर बनाए हुए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया गया है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम का महत्व: यह मामला लोक सेवा गारंटी अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ा है। इस अधिनियम के तहत नागरिकों को निर्धारित समय सीमा में सेवाएं प्रदान करने का प्रावधान है। मुस्तकिम के अनुसार, पटवारी श्रवण पांडेय ने इस अधिनियम का पालन नहीं किया और निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा नहीं किया।
मुस्तकिम का कलेक्टर से अनुरोध: मुस्तकिम ने कलेक्टर से स्पष्ट रूप से कहा कि वह गरीब हैं और उनके पास रिश्वत देने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। उन्होंने कलेक्टर से 8500 रुपए उधार देने का अनुरोध किया ताकि वह पटवारी को रिश्वत दे सकें और अपने काम को आगे बढ़ा सकें। उन्होंने वादा किया कि वह यह रकम एक महीने के भीतर वापस कर देंगे।
शिकायत का प्रभाव: मुस्तकिम के इस कदम से प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है। इस मामले ने ना केवल पटवारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार के गहरे पहलू को भी उजागर किया है। मामले की जांच शुरू हो चुकी है और आगे की कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों की निगरानी में इसे रखा गया है।
एसडीएम की प्रतिक्रिया: एसडीएम फागेश सिन्हा ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी। जनदर्शन में आई शिकायत की जांच हो रही है और जांच के परिणाम के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
 
यह मामला छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार की एक और कड़ी को उजागर करता है। गरीब भू-स्वामी मुस्तकिम की शिकायत ने ना केवल पटवारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नागरिकों को समय पर सेवाएं प्रदान करने की प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित को न्याय कैसे मिलता है।
 
Tags

शेयर करें

विज्ञापन / Advertisement

Government Advertisement
260916013451712

विज्ञापन

Advertisement